अब मधुमेह के मरीज़ों को बिना दर्द हुए मिल सकता है इंसुलिन

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डायबिटीज़ को लेकर हुई एक रिसर्च के परिणाम मधुमेह के मरीज़ों के लिए एक बड़ी खुशखबरी लाए हैं। शोधकर्ताओं ने हाल ही में एक दर्द रहित स्किन पैच विकसित किया है जिसमें ग्‍लूकोज़ को स्‍वत: बनाने वाले घुलनशील यौगिक शामिल हैं।

डायबिटीज़ एक ऐसा विकार है जिसमें शरीर में इंसुलिन नहीं बन पाता है या हार्मोन इंसुलिन बना पाने में असमर्थ होते हैं। इसकी वजह मेटाबॉलिज्‍म कार्बोहाइड्रेट को पचा नहीं पाता है और ब्‍लड शुगर लेवल बढ़ जाता है। वर्तमान समय में दुनियाभर के लोग सबसे ज्‍यादा डायबिटीज़ की बीमारी से ग्रस्‍त हैं। भारत में मधुमेह हर मिनट में हज़ारों लोगों को अपना शिकार बना रहा है। वैश्विक तौर पर डायबिटीज़ के सभी प्रकारों जैसे टाइप 1, टाइप 2 और जेस्‍टेशनल डायबिटीज़ आदि से ग्रस्‍त मरीज़ों की संख्‍या लगभग 285 मिलियन है। इनमें से 90 प्रतिशत लोग टाइप 2 डायबिटीज़ से ग्रस्‍त हैं।

टाइप 2 डाय‍बिटीज़ के मरीज़ों को खाने के बाद इंसुलिन लेना जरूरी होता है ताकि उनके बढ़े हुए शुगर की मात्रा को संतुलित रखा जा सके। कई बार खाने के तुरंत बाद इंसुलिन लेना असुविधाजनक होता है लेकिन फिर भी इसे लेना जरूरी है। हाल ही में हुए एक अध्‍ययन में एक बायोकेमिकल फॉर्म्‍यूला पाया गया है जिसके अनुसार खनिज यौगिकों के पैच से एक बार में ही कई दिनों तक के लिए शुगर की पूर्ति की जा सकती है।

इस अध्‍ययन में चूहों पर रिसर्च की गई थी। शोधकर्ताओं का कहना है कि घुलनशील माइक्रोनिडल्‍स के बायोकेमिकली रूप से तैयार पैच से टाइप 2 डायबिटीज़ को नियंत्रित करना आसान हो सकता है।

नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल इमेजिंग एंड बायोइंजीनियरिंग के रिचर्ड लीपमैन का कहना है कि इस रिसर्च से पता चलता है कि टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ों में अब भी इंसुलिन बनने की संभावना बाकी है।

रोज़ इंसुलिन लेने की बजाय सप्‍ताह में एक बार माइक्रोनिडल पैच से इंसुलिन लेना ज्‍यादा आसान और दर्दरहित है।

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इस प्रायोगिक पैच का आधार एल्गिनेट नामक सामग्री से बनाया गया है। एल्गिनेट एक प्राकृतिक तत्‍व है जिसे ब्राउन एल्‍गी से तोड़ा जा सकता है। इसे चिकित्‍सकीय यौगिकों के साथ मिक्‍स कर ‍एक माइक्रोनिडल में डालकर पैच के रूप में तैयार किया गया है।

एनआईबीआईबी के शोधकर्ता सिआओयुआन चेन का कहना है कि एल्गिनेट एक लचीला पदार्थ है जोकि थोड़ा मुलायम होता है।

अग्‍नाश्‍य में बनने वाला इंसुलिन एक हार्मोन है जोकि रक्‍त कोशिकाओं में स्रावित होता है और ये खाने को ग्‍लूकोज़ के रूप में तब्‍दील करने का काम करता है। मधुमेह के कुछ मरीज़ों को इंसुलिन थेरेपी की जरूरत होती है जिसमे रोज़ मरीज़ को इंजेक्‍शन के ज़रिए इंसुलिन दिया जाता है। इन लोगों के रक्‍त में प्राकृतिक रूप से इंसुलिन नहीं बन पाता है।

इसकी जगह एनआईबीआईबी द्वारा विकसित की गई वैकल्पिक चिकित्सा मधुमेह के मरीज़ों के लिए ज्‍यादा सुविधाजनक है।

डायबिटीज़ की बीमारी में शरीर में इंसुलिन की कमी की वजह से ब्‍लड शुगर का स्‍तर बहुत ज्‍यादा हो जाता है। इंसुलिन अग्‍नाश्‍य में स्रावित एक हार्मोन है जो कि उसे नियंत्रित करता है। अगर आपकी बॉडी में इंसुलिन ठीक तरह से नहीं बन पा रहा है तो आप योग और व्‍यायाम से इसे संतुलित कर सकते हैं। इसके अलावा शरीर में प्राकृतिक तरीके से ब्‍लड शुगर के स्‍तर को नियंत्रित करने के लिए आप ये सुपरफूड भी खा सकते हैं।

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  • हाल ही में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है कि जौ में उपलब्‍ध डाइट्री फाइबर्स से पाचन तंत्र दुरुस्‍त रहता है और ब्‍लड शुगर का स्‍तर भी नियंत्रित रहता है। साबुत अनाज जैसे ओट्स, ब्राउन राइस और ज्‍वार और दलिया आदि खाएं।
  • केले, आलू, अनाज और फलियों में प्रतिरोधी स्‍टार्च होता है जोकि ब्‍लड शुगर को नियंत्रित करता है।
  • नट्स में अनसैचुरेटेड फैट, प्रोटीन और विटामिंस और मिनरल्‍स प्रचुर मात्रा में होते हैं जोकि कोलेस्‍ट्रॉल और इंसुलिन रेसिस्‍टेंस की समस्‍या को दूर करते हैं। आप 50 ग्राम बादाम, काजू, किशमिश, अखरोट और पिस्‍ता खा सकते हैं। नियमित आहार में इतनी मात्रा में सूखे मेवे को शामिल कर ब्‍लड फैट और शुगर की बढ़ी मात्रा को नियंत्रित किया जा सकता है।
  • हम सभी जानते हैं कि मधुमेह रोगियों के लिए करेला बेहद लाभदायी होता है। करेले में पॉलीपेप्‍टाइड पी नामक तत्‍व होता है जोकि प्राकृतिक रूप से मधुमेह को कंट्रोल रखता है।

अपने नियमित आहार में इन चीज़ों को शामिल कर आप मधुमेह के बावजूद स्‍वस्‍थ जीवन जी सकते हैं। अगर आप अपनी जीवनशैली में कुछ पर्याप्‍त बदलाव करें तो आप डायबिटीज़ जैसी घातक बीमारी पर कंट्रोल पा सकते हैं।

बेहतर होगा कि आप डायबिटीज़ के होने का इंतज़ार ना करें और पहले से ही इससे बचाव का काम शुरु कर दें।

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