कुछ इस तरह मधुमेह रोगी भी पी सकते हैं फलों का रस

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डायबिटीज़ की बीमारी को स्‍वस्‍थ आहार के ज़रिए ठीक या नियंत्रित किया जा सकता है। हैल्‍दी डाइट के अलावा कुछ फलों के रस भी मधुमेह रोगी पी सकते हैं। हालांकि, जूस से ज्‍यादा सेहतमंद मधुमेह रोगियों के लिए सभी फल खाना रहता है।

जूस और डायबिटीज़

अंगूर का जूस, अनानास का रस और संतरे का रस मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद रहता है। मधुमेह रोगियों के लिए सभी तरह के सिट्रस फलों के रस सेहतमंद और लाभदायक रहते हैं। इनमें पोषक तत्‍व प्रचुर मात्रा में होते हैं।

सिट्रस फलों के रस के अलावा डायबिटीज़ के मरीज़ सेब का रस भी पी सकते हैं। सेब के जूस में फाइबर उच्‍च मात्रा में होता है। नीबू के रस में कार्बोहाइड्रेट कम होता है और टमाटर का रस में शुगर की मात्रा कम होती है और गाजर का जूस भी मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद रहता है। आपको बता दें कि जूस का ये नियम डायबिटीज़ टाइप 1 और टाइप 2 दोनों तरह के मरीज़ों के लिए है।

हालांकि, सभी फलों के रस में थोड़ी शुगर की मात्रा भी मौजूद हेती है जिससे रक्‍त शर्करा का स्‍तर बढ़ सकता है इसलिए इन फलों के रस में कुछ बदलाव कर इनका सेवन करें ताकि आपको इनसे कोई नुकसान ना हो।

जूस में कार्बोहाइड्रेट भी होता है जोकि आपके रोज़ाना के कार्बोहाइड्रेट की मात्रा को बढ़ा सकता है। खाने के साथ जूस लेने से निश्चित ही जूस में मौजूद शर्करा की मात्रा कम होती है। जबकि सिट्रस फलों के रस ग्‍लाइसेमिक इंडेक्‍स टेबल में लो रहते हैं। अनानास और संतरे का रस 46 अंक और अंगूर का रस 48 अंक पर होता है। फलों के रस के अलावा चाय भी मधुमेह रोगियो के लिए फायदेमंद रहती है।

जूस में कार्बोहाइड्रेट मौजूद होता है जिसकी वजह से ब्‍लड शुगर का स्‍तर बढ़ सकता है। इसका असर हर मधुमेह रोगी पर अलग-अलग होता है। अगर आप मधुमेह रोगी हैं और आपको फलों का रस पीना पसंद है तो इन बातों को ध्‍यान में रखें।

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  • जो भी जूस पीएं उसकी एक दिन की मात्रा 4 आउंस रखें। एक दिन में इतनी मात्रा में रस पी सकते हैं।
  • अकेले जूस पीने से काफी तेजी से ब्‍लड ग्‍लूकोज़ का स्‍तर बढ़ सकता है इसलिए बेहतर होगा कि आप खाना खाते समय जूस का सेवन करें।
  • मधुमेह के मरीज़ों को कभी भी जूस में शक्‍कर या चीनी मिलानी नहीं चाहिए। ऐसा करना उनके लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
  • मधुमेह रोगियों को ताजा फलों और सब्जियों का रस पीना चाहिए। ताजा रस से मधुमेह रोगियों को कोई नुकसान नहीं होता है। मधुमेह रोगियों के लिए सेब और गाजर का जूस सबसे अधिक फायदेमंद होता है।
  • कड़ा व्‍यायाम और व्रत रखने से अचानक ब्‍लड शुगर का स्‍तर गिर सकता है। ऐसे में डॉक्‍टर द्वारा बताई गई मात्रा में जूस का सेवन कर सकते हैं।

हर जूस में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अलग होती है इसलिए ब्‍लड शुगर पर हर जूस का अलग असर पड़ता है। सभी फलों के रस शरीर में जाकर रक्‍त शर्करा पर एक जैसा प्रभाव नहीं दिखाते हैं। जूस के पोषक तत्‍वों और शुगर की मात्रा को जानने के लिए उसके कंटेनर पर दी गई जानकारी जरूर पढ़ें।

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जिन फलों के रस में शुगर की मात्रा ना के बराबर होती है वो मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद रहते हैं। शुगर फ्री जूस में कार्बोहाइड्रेट और कैलारी की मात्रा शुगरयुक्‍त जूस की तुलना में कम होती है। इनमें विटामिन और मिनरल्‍स की मात्रा बहुत ज्‍यादा होती है जो डायबिटीक पेशेंट के लिए जरूरी है।

आप किसी भी फल का रस पीएं, हर फल में प्रचुर मात्रा में कार्बोहाइड्रेट होता है जोकि आपकी डाइट में जुड़ सकता है। इससे आपकी डाइट और भी ज्‍यादा हैल्‍दी हो जाएगी। डाइट में साबुत अनाज शामिल कर के उसे और भी ज्‍यादा हैल्‍दी बनाया जा सकता है।

सोडियम की मात्रा कम रखने वाली सब्जियों का रस भी फलों के रस की जगह पीया जा सकत है। एक कप वेजिटेबल जूस में 10 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है और 50 कैलोरी जबकि फलों के रस में 15 ग्राम कार्बोहाइड्रेट और 50 से अधिक कैलोरी होती है।

वैसे तो आप फलों का रस ले सकते हैं लेकिन इसकी जगह सब्जियों का रस ज्‍यादा फायदेमंद रहता है।

तो अब अगर आप फलों का रस पीने का शौक रखते हैं तो इस लेख को पढ़ने के बाद आपको अपने मन को मारने की जरूरत नहीं है। अगर आप फलों के रस के साथ बादाम का सेवन भी करेंगें तो इससे आपका ब्‍लड शुगर का स्‍तर सामान्‍य रहेगा। व्‍यायाम और योग से भी मधुमेह को नियंत्रित किया जा सकता है।

इन छोटी-छोटी बातों को ध्‍यान में रखकर मधुमेह रोगी भी स्‍वस्‍थ जीवन जी सकते हैं।

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