ये है मधुमेह और डिप्रेशन के बीच संबंध, जानें इससे निपटने के तरीके

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मधुमेह के रोगियों में डिप्रेशन का खतरा सामान्‍य लोगों की तुलना में ज्‍यादा रहता है। डिप्रेशन एक ऐसी समस्‍या है जो इंसान स्‍वयं अपने आप को देता है। इससे ब्‍लड शुगर का स्‍तर और मधुमेह की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

अगर आप तनाव में रहते हैं तो अपने डॉक्‍टर को इस बारे में बताएं।

डायबिटीज़ और डिप्रेशन का संबंध

तनाव एक गंभीर रोग है। इसका कारण आनुवांशिक, वातावरण या भावनाएं हो सकती हैं। मधुमेह को संभालना बेहद तनावपूर्ण हो सकता है। इसमें समय भी ज्‍यादा लगता है। जीवनैशली और डाइट को सीमित कर लेने से जीवन नीरस होने लगता है।

तनाव के लक्षण

दुखी रहना, बेचैनी, परेशान रहना, अपनी पसंद की चीज़ों में दिलचस्‍पी ना रहना, सोशल लाइफ से दूर रहना, फोकस करने में असफल, ऊर्जा में कमी, पाचन का कमज़ोर होना और मानसिक और शारीरिक सुस्‍ती और आत्‍महत्‍या का विचार आना।

कैसे करें पता

तनाव के लिए कोई टेस्‍ट नहीं किया जा सकता है। लक्षणों के आधार पर डॉक्‍टर इसका पता लगा सकते हैं।

कैसे होता है उपचार

डॉक्‍टर आपको इनमें से कोई एक या अधिक दवा लेने की सलाह दे सकते हैं :

सेलेक्टिव सेरोटोनिन रियूप्‍टेक इंहिबिटर्स

मस्तिष्‍क के सेरोटोनिन नामक केमिकल के प्रयोग पर ये दवा असर करती है। इस केमिकल के संतुलन से मस्तिष्‍क की कोशिकाएं संदेश ले पाती हैं और मूड को बेहतर बनाती हैं।

सेरोटोनिन नोरेपिनेफ्राइन रियूप्‍टेक इंहिबिटर्स

ये सेरोटोनिन और नोरेपिनेफ्राइन दोनों के री-एब्‍जॉर्ब्‍शन को ब्‍लॉक कर देती है। ये भी मस्तिष्‍क की कोशिकाओं को संदेश लेने में मदद करती हैं।

ट्राईसाइक्‍लिक

ये एंटी डिप्रेसेंट दवा मस्तिष्‍क में कुछ केमिकल्‍स के स्‍तर को बढ़ाती हैं जिनसे तंत्रिका कोशिकाएं एक-दूसरे के साथ संचार कर पाती हैं। अगर इन केमिकल्‍स का संतुलन बिगड़ जाए तो मस्तिष्‍क तक सही तरह से संदेश नहीं पहुंच पाता है और तनाव उत्‍पन्‍न होता है।

हालांकि इन सभी दवाओं के हानिकारक प्रभाव हैं। इन दवाओं की आदत पड़ जाने पर डॉक्‍टर द्वारा इसकी खुराक कम कर देने और फिर धीरे-धीरे बंद कर देने से आपको इसकी लत से मुक्‍ति मिल जाएगा।

कई शोधों में ये बात सामने आई है कि ट्राईसाइक्‍लिक और सेलेक्टिव सेरोटोनिन रियूप्‍टेक इंहिबिटर्स के प्रयोग से मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है। ट्राईसाइक्‍लिक से वजन भी बढ़ सकता है जबकि इस बात के भी साक्ष्‍य मिले हैं कि ये दवाएं टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ों में ब्‍लड शुगर के स्‍तर को भी नियंत्रित करती हैं।

काउंसलिंग या साइकोथेरेपी और दवाओं से डिप्रेशन का ईलाज संभव है। दोस्‍तों और रिश्‍तेदारों का साथ भी फायदेमंद रहता है। इस बारे में अपने डॉक्‍टर से बात करें।

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Depression and Diabetes: Is There a Link?

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