अकेले खाना खाने से हो सकती है प्री डायबिटीज़, रिसर्च में हुआ खुलासा

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हाल ही में किए गए एक अध्‍ययन में ये बात सामने आई है कि खाने के दौरान बातें न करने की वजह से प्री डायबिटीज़ का खतरा बढ़ सकता है।

पिछले अध्‍ययन में प्री डायबिटीज़ के मरीज़ों में सोशल सपोर्ट के महत्‍व और इसके मरीज़ों के मनोवैज्ञानिक स्‍वास्‍थ्‍य को सोशल सपोर्ट से सुधारने की बात कही गई थी।

इस शोध में डोंगुक यूनिवर्सिटी इल्‍सान हॉस्‍पीटल के कोरियाई शोधकर्ताओं ने अकेले खाने पर मेटाबॉ‍लिक रिस्‍क और मेटाबॉलिक सिंड्रोम के फैलने की जांच की है।

मेटाबॉलिक सिंड्रोम के अंतर्गत कई तरह की परिस्थितियों के एकसाथ होने पर व्‍यक्‍ति बहुत ज्‍यादा बीमार पड़ सकता है। इसे प्री डायबिटीज़ भी कहा जाता है।

मेटाबॉलिक सिंड्रोम में टाइप 2 मधमेह का खतरा पांच गुना और ह्रदय संबंधित रोगों का खतरा तीन गुना तक बढ़ जाता है।

कोरियाई नेशनल हेल्‍थ एंड न्‍यूट्रिशियन एग्‍जामिनेशन सर्वे से 7725 महिलाओं और पुरुषों को इस शोध में शामिल किया गया। इन प्रतिभागियों ने अपनी खानपान की आदतों जैसे कि वो अकेले खाते हैं या अपने परिवार के साथ बैठकर खाते हैं और एक दिन में कितनी बार खाते हैं आदि के बारे में शोधकर्ताओं को बताया।
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इसके अलावा शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों की सोशल लाइफ जैसे कि वो अकेले रहते हैं आदि के बारे में भी जानकारी हासिल की। इससे उन्‍हें पता चलता कि अकेले खाने पर मेटाबॉलिक सिंड्रोम का खतरा बढ़ता है या नहीं।

शोध में वैज्ञानिकों ने पाया कि दिन में दो बार से ज्‍यादा अकेले खाना खाने वाली महिला और पुरुष दोनों में ही मेटाबॉलिक सिंड्रोम का खतरा ज्‍यादा पाया गया। ये निष्‍कर्ष उन लोगों की तुलना में थे जिन्‍होंने कभी अकेले नहीं खाया।

दिन में दो बार से ज्‍यादा अकेले खाना खाने वाले पुरुषों में 29.4 प्रतिशत मोटापा और 36.9 प्रतिशत की जगह 41.6 प्रतिशत ग्‍लूकोज़ की मात्रा पाई गई। इनमें उच्‍च रक्‍तचाप भी दर्ज किया गया।

अकेले खाना खाने वाले पुरुषों में मेटाबॉलिक सिंड्रोम का खतरा तीन गुना ज्‍यादा पाया गया। वहीं दिन में दो या उससे ज्‍यादा बार अकेले खाने वाली महिलाओं की तुलना में दिन में एक बार खाना खाने वाली महिलाओं में मेटाबॉलिक सिंड्रोम का खतरा कम था।

इस अध्‍ययन से पता चलता है कि अकेले रहने या खाने से इंसान बीमारियों से ग्रस्‍त हो जाता है। अकेले खाना खाने वाले लोगों को मेटाबॉलिक सिंड्रोम का खतरा ज्‍यादा रहता है जो आगे चलकर डायबिटीज़ 2 का रूप ले लेता है। इस सिंड्रोम को आप प्री डायबिटीज़ भी कह सकते हैं।

इस शोध की रिपोर्ट जरनल ओबेसिटी रिसर्च एंड कलीनिकल प्रैक्‍टिस में प्रकाशित की जा चुकी है।

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