दुल्‍हन बनी सोनम कपूर को भी है डायबिटीज़ बीमारी, जानें कैसे रखती हैं अपना ध्‍यान

Picture credit : hotfridaytalks.com

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हर जगह बॉलीवुड एक्‍ट्रेस सोनम कपूर की शादी की बातें चल रही हैं। हाल ही में सोनम ने अपने ब्‍वॉयफ्रेंड आनंद आहूजा से शादी की है और ऐसे में उनके जीवन की कुछ खास बातें जानना तो बनता है।

इतने काम के बीच स्‍टार्स को अपने खाने-पीने का बहुत ध्‍यान रखना पड़ता है। अगर आप सही तरह से खाएंगें तभी तो इतनी फिल्‍में, प्रमोशन, विज्ञापन वगैरह कर पाएंगें।

आपको बता दें कि सोनम कपूर को 17 साल की उम्र में ही डायबिटीज़ की बीमारी हो गई थी। आप सोच रहे होंगें कि जब स्‍टार्स अपनी हैल्‍थ का इतना ध्‍यान रखते हैं और रोज़ जिम में घंटों बिताते हैं तो फिर उन्‍हें कैसे इतनी खतरनाक बीमारी हो गई। सोनम कपूर को टाइप 1 डायबिटीज़ की बीमारी है जोकि बचपन में ही हो जाती है।

टाइप 2 डायबिटीज़ अधिकतर 35 की उम्र पार करने के बाद होती है जबकि टाइप 1 डायबिटीज़ का शिकार बच्‍चे होते हैं। लाइफस्‍टाइल में हैल्‍दी बदलाव और संतुलित आ‍हार से टाइप 2 डायबिटीज़ को तो ठीक किया जा सकता लेकिन टाइप 1 डायबिटीज़ पूरी जिंदगी साथ रहती है।

सोनम कपूर को भी अब पूरी जिंदगी टाइप 1 डायबिटीज़ के साथ ही बितानी पड़ेगी।

तो चलिए जानते हैं डायबिटीज़ के बारे में कुछ बातें :

डायबिटीज़ की बीमारी को पांच अलग ग्रुप्‍स में बांटा गया है जबकि लोगों को इसके दो प्रकारों के बारे में ही ज्‍यादा पता है।

डायबिटीज़ को दो प्रमुख समूहों – टाइप 1 डायबिटीज़ और टाइप 2 डायबिटीज़ में बांटा गया है। टाइप 1 के 10 प्रतिशत मरीज़ होते हैं जबकि मधुमेह के 85 से 90 प्रतिशत मरीज़ टाइप 2 के शिकार होते हैं।

टाइप 1 डायबिटीज़ की बीमारी बचपन में होती है और ये एक ऑटोइम्‍यून बीमारी है जिसमें पैंक्रियाज़ में इंसुलिन कम या बिलकुल ही बनना बंद हो जाता है। जबकि टाइप 2 मधुमेह में शरीर में इंसुलिन नामक हार्मोन पर्याप्‍त मात्रा में नहीं बन पाता है।

इसके अलावा डायबिटीज़ 3 और टाइप की होती है।

विशेषज्ञों की मानें तो डायबिटीज़ की बीमारी दुनियाभर में बड़ी तेजी से बढ़ रही है और वर्तमान में जो इसका ईलाज उपलब्‍ध है वो इस बीमारी को जड़ से मिटाने में असफल है। उनकी मानें तो अभी डायबिटीज़ का पता लगाने का सिर्फ एक ही तरीका है जिसमें शरीर में ग्‍लूकोज़ बनने की क्षमता को मापा जाता है। जब ये बीमारी ज्‍यादा गंभीर हो जाती है या दिक्‍कतें बढ़ जाती हैं तब इसके बारे में पता चलता है।

इसी पर आधारित 75 से 85 प्रतिशत लोग टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ हैं। डायबिटीज़ का तीसरा उपसमूह किशोरों में ऑटोइम्‍यून डायबिटीज़ हैइसके बारे में भी इस रिसर्च में बात की गई है।

स्‍टडी के परिणाम के अनुसार मरीज़ों को पांच अलग भागों में बांटा गया है जो इस प्रकार हैं :

Picture credit : webmd.com

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समूह 1 : ऑटोइम्‍यून डायबिटीज़ को टाइप 1 मधुमेह की ही तरह बताया गया है। ये किशोरावस्‍था में मरीज़ को अपना शिकार बनाती है और इसमें शरीर में इंसुलिन का उत्‍पादन करने की क्षमता नहीं बचती है। ये एक इम्‍यून रोग है।

समूह 2 : इसमें इंसुलिन की कमी वाले मधुमेह के मरीज़ थे जोकि पहले समूह से ही मिलते-जुलते थे। इसमें किशोरावस्‍था में ही संतुलित वजन होने पर भी शरीर को इंसुलिन बनाने में दिक्‍कत आती है।

समूह 3 : इसमें ओवरवेट डायबिटीज़ के मरीज़ों में गंभीर रूप से इंसुलिन रेसिस्‍टेंट दिक्‍कत थी। इनमें इंसुलिन तो बन रहा था लेकिन बॉडी इंसुलिन के प्रति प्रतिक्रिया नहीं दे पा रही थी।

समूह 4 : ओवरवेट लोगों में जिनका मेटाबॉलिक समूह 3 के आसपास था उनमें कम मोटापे के साथ डायबिटीज़ की बीमारी थी।

समूह 5 : इस समूह के लोगों में अन्‍य समूह के लोगों के तुलना में थोड़ी ज्‍यादा उम्र में इस बीमारी का विकास होना शुरु हुआ था।

इनमें से 3 गंभीर टाइप वाले डायबिटीज़ का ईलाज बाकी दो सौम्‍य प्रकार से ज्‍यादा जरूरी है।

दूसरे समूह के मरीज़ों को टाइप 2 डायबिटीज़ के रूप में परिभाषित किया गया क्‍योंकि ये ऑटोइम्‍यून रोग नहीं है।

अभी तक डायबिटीज़ के तीन प्रकार ज्‍यादा प्रसिद्ध हैं जिनमें टाइप 1, टाइप 2 और टाइप 3 डायबिटीज़ है। सालों से विशेषज्ञ मधुमेह के ईलाजगंभीरता और दिक्‍कतों को लेकर अध्‍ययन कर रहे हैं लेकिन अब तक इसके और प्रकारों के बारे में जानने के लिए रिसर्च नहीं हुई थी।

सोनम कैसे रखती हैं ध्‍यान

Picture credit : akm-img-a-in.tosshub.com

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मधुमेह को साइलेंट किलर कहा जाता है लेकिन सोनम इसके जाल में कभी नहीं फंसी हैं। जीवनशैली में कुछ सामान्‍य बदलाव कर इस बीमारी को बड़ी आसानी से ठीक किया जा सकता है। शहरीकरण और सस्‍ती कैलोरीज़ की वजह से मधुमेह की समस्‍या बढ़ती जा रही है। आपको इस बीमारी को पूरा समय देना पड़ेगा ताकि ये आपके करियर और लाइफ के लिए परेशानी ना बने।

बचपन में सोनम ओबेसिटी का शिकार थी और शायद इसी वजह से वो टाइप 1 डायबिटीज़ का शिकार बन गईं। सोनम को रोज़ दवाएं और इंसुलिन इंजेक्‍शन लेना पड़ता है।

एक्‍ट्रेस होने के नाते सोनम को अपनी फिटनेस और खाने का बहुत ध्‍यान रखना पड़ता है। वो पूरा दिन में छोटी-छोटी मील लेती हैं और कभी भी अपना वर्कआउट सेशन मिस नहीं करती हैं। वर्कआउट में सोनम पॉवर योगा, पिलेट्स और वेट ट्रेनिंग के साथ क‍थक डांस भी करती हैं। इसके अलावा सोनम हफ्ते में 2 से 3 बार स्‍कवैश भी खेलती हैं।

सोनम के दिन की शुरुआत जॉगिंग से होती है और इसके बाद वो योग और मेडिटेशन करती हैं। सोनम कई सालों से एंटी डायबिटीक दवाएं ले रही हैं।

सोनम कपूर के लाइफस्‍टाइल के बारे में जानने के बाद आप भी समझ सकते हैं कि एक्‍सरसाइज़ और लाइफस्‍टाइल में बदलाव कर आप भी इस बीमारी को कंट्रोल कर सकते हैं। अगर आप भी सोनम की तरह रोज़ योग या वर्कआउट करेंगें तो आप भी इस पर कंट्रोल पा सकेंगें।

इस बात को नज़रअंदाज़ ना करें कि डायबिटीज़ को हल्‍के में लेना आपकी जान के लिए खतरा बन सकता है। मधुमेह में अपने खानपान की आदतों का खास ध्‍यान रखें वरना आपकी ही मुश्किलें बढ़ सकती हैं। किसी भी चीज़ को अपनी डाइट में शामिल करने से पहले अपने डॉक्‍टर से सलाह जरूर लें।

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