गर्म मौसम में प्रेग्‍नेंट होने वाली महिलाओं में ज्‍यादा रहता है जेस्‍टेशनल डायबिटीज़ का खतरा

Picture credit : reference.com

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कई शोधकर्ताओं ने गर्भावस्‍था और आसपास के तापमान एवं पर्यावरण के बीच संबंध बताया है। सैंट. माइकल हॉस्‍पीटल के शोधकर्ताओं का कहना है कि वातावरण और तापमान का असर गर्भवती महिला पर पड़ता है और इसके लिए उन्‍होंने इस विषय पर अध्‍ययन भी किया है।

जो महिलाएं 24 डिग्री सेल्सियस या इससे अधिक के तापमान में रहीं उनमें 7.7 प्रतिशत जेस्‍टेशनल डायबिटीज़ का खतरा ज्‍यादा पाया गया। वहीं ठंडे तापमान में रहने वाली महिलाओं में 4.6 प्रतिशत खतरा पाया गया। हर 10 डिग्री सेल्सियस तापमान के बढ़ने पर जेस्‍टेशनल डायबिटीज़ का खतरा 6 से 9 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। ये स्‍टडी कैनेडियन मेडिकल एसोसिएशन जर्नल में प्रकाशित हो चुकी है और इस स्‍टडी के लिए 12 साल के दौरान 396,828 महिलाओं को शामिल किया गया था जिन्‍होंने 555,911 बच्‍चों को जन्‍म दिया।

कई लोगों का मानना है कि गर्म मौसम में बाहर निकलने पर महिलाएं ज्‍यादा सक्रिय रहती हैं जिससे गर्भावस्‍था के दौरान उनका वजन नहीं बढ़ता है और ये जेस्‍टेशनल डायबिटीज़ के खतरे को भी कम देता है।

वहीं इससे पहले हुई कुछ स्‍टडीज़ में यह बात सामने आई है कि ठंडे तापमान में कुछ ऐसे टिश्‍यूज़ सक्रिय हो जाते हैं जो कैलोरी घटाने, मेटाबॉलिज्‍म को बढ़ाने और इंसुलिन को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन महिलाओं ने ठंडे तापमान में अपने शिशु को जन्‍म दिया उनमें गर्भावस्‍था के दौरान गर्भावधि मधुमेह का खतरा 3.6 प्रतिशत था जबकि गर्म तापमान में गर्भवती होने वाली महिलाओं में ये खतरा 6.3 प्रतिशत पाया गया।

क्‍या जेस्‍टेशनल डायबिटीज़

गर्भावस्‍था में कोर्टिसोल, एस्‍ट्रोजन जैसे हार्मोन के बढ़ने से शरीर में ब्‍लड शुगर की क्रिया में बाधा उत्‍पन्‍न होती है। इस अवस्‍था को इंसुलिन रेस्सिटेंस यानि इंसुलिन प्रतिरोध कहा जाता है। शरीर में इंसुलिन बनाने वाले अंग को पैंक्रियाज़ कहा जाता है। इनमें इंसुलिन प्रतिरोध द्वारा इंसुलिन में आई कमी की भरपाई करने की क्षमता होती है। अगर शरीर में पैंक्रियाज़ बढ़े हार्मोन के कारण पर्याप्‍त मात्रा में इंसुलिन का निर्माण नहीं कर पाते हैं तो शरीर में ब्‍लड शुगर का स्‍तर बढ़ जाता है और महिलाएं गर्भकालीन यानि गर्भाविध मधुमेह का शिकार हो जाती हैं।

तले खाने से बढ़ता है जेस्‍टेशनल डायबिटीज़ का खतरा

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि खाने को फ्राई करने के बाद वह उस फूड में एक हानिकारक केमिकल छोड़ता है जिसका असर शरीर में ब्‍लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने की प्रक्रिया पर पड़ता है।

जब गर्भावस्‍था के दौरान महिलाओं के शरीर में पर्याप्‍त मात्रा में इंसुलिन नहीं बन पाता है तो उनका ब्‍लड शुगर का स्‍तर बढ़ जाता है। जिन मामलों में इस रोग की पहचान समय पर नहीं हो पाती है उनमें प्रीमैच्‍योर बर्थ और शिशु के बहुत छोटे होने या जन्‍म के बाद मृत्‍यु का खतरा बढ़ जाता है।

गर्भावधि मधुमेह का कारण

अगर शरीर में पैंक्रियाज़ बढ़े हार्मोन के कारण पर्याप्‍त मात्रा में इंसुलिन का निर्माण नहीं कर पाते हैं तो शरीर में ब्‍लड शुगर का स्‍तर बढ़ जाता है और महिलाएं गर्भकालीन यानि गर्भावधि मधुमेह का शिकार हो जाती हैं।

इसके अलावा गर्भावधि मधुमेह के कई और भी कारण हो सकते हैं जो इस प्रकार हैं -:

  • अगर आप बहुत ज्‍यादा मोटी या ओवरवेट हैं।
  • इस प्रेग्‍नेंसी से पहले 4-5 किलो से अधिक वजन वाले बच्‍चे को जन्‍म दिया हो।
  • पिछली गर्भावस्‍था में गर्भावधि मधुमेह से ग्रस्‍त रही हों।
  • अगर आपके परिवार में मधुमेह का इतिहास रह चुका हो यानि की अपके लिए मधुमेह एक आनुवांशिक बीमारी हो।
  • हाई ब्‍लड प्रेशर या किसी और बीमारी की वजह से भी गर्भावधि मधुमेह हो जाता है।
  • पहले बच्‍चे के मृत या किसी प्रकार के दोष से ग्रसित हो।
  • 30 से ज्‍यादा की उम्र में गर्भवती होने पर।

जेस्‍टेशनल डायबिटीज़ के लक्षण

गर्भावधि मधुमेह के कारण महिलाओं को अधिक प्‍यास लगती है और बार-बार पेशाब आता है और थकावट महसूस होती है।

अगर समय रहते जेस्‍टेशनल डायबिटीज का ईलाज ना किया जाए तो इसका असर होने वाले बच्‍चे पर भी पड़ सकता है और उसे भी कोई गंभीर समस्‍या हो सकती है। जिन गर्भवती महिलाओं में इस बीमारी का उपचार नहीं करवाया जाता है उनके बच्‍चे अधिक वजन वाले पैदा होते हैं। साथ ही जन्‍म के बाद बच्‍चे के ब्‍लड शुगर का स्‍तर भी अचानक से गिर सकता है। इसकी आपूर्ति इंजेक्‍शन द्वारा करनी पड़ती है।

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