मिल गया डायबिटीज़ के बढ़ते मरीज़ों का सबसे बड़ा कारण

Picture credit : diabetesbienestarysalud.com

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फ्रूक्‍टोज़ शुगर का एक ऐसा प्रकार है जो फलों, सब्जियों और शहद में पाया जाता है। हमारे शरीर में फ्रूक्‍टोज़ नहीं बनता है बल्कि जो भी हम खाते हैं उसे लिवर द्वारा मेटाबोलाइज़ करके फ्रूक्‍टोज़ बनता है। शरीर में अतिरिक्‍त मात्रा में फ्रूक्‍टोज़ होने पर वो वसा के रूप में बदल जाता है। अधिकतर फ्रूक्‍टोज़ का प्रयोग स्‍वीटनर के रूप में जैसे हाई फ्रूक्‍टोज़ कॉर्न सिरप जिसे फूड और फिज़ी ड्रिंक्‍स में मिलाया जाता है।

कुछ समय पहले मायो क्‍लीनिक द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि मिश्रित शुगर वाले खाद्यों और बेवरेज़ेज़ खासतौर पर फ्रूक्‍टोज़ टाइप 2 डायबिटीज़ के बढ़ते मरीज़ों का प्रमुख कारण है।

धीरे-धीरे डायबिटीज़ पूरी दुनिया में फैल रहा है। लगभग हर दस में से एक युवा व्‍यक्‍ति टाइप 2 डायबिटीज़ से ग्रस्‍त है। दुनियाभर में 1980 में 153 मिलियन लोग मधुमेह का शिकार थे जबकि साल 2008 में ये आंकड़ा बढ़कर 347 मिलियन हो गया। वर्तमान समय में मिश्रित शुगर के सेवन और मिश्रित फ्रूक्‍टोज़ के सेवन से टाइप 2 डायबिटीज़ की स्थि‍ति और भी ज्‍यादा भयावह होती जा रही है।

स्‍टडी के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि कुछ इंग्रेडिएंट्स मधुमेह के खतरे को बढ़ाते हैं और सभी कैलोरीज़ एक जैसी नहीं होती हैं। उन्‍होंने स्‍टार्च से कार्बोहाइड्रेट, शुद्ध ग्‍लूकोज़ और लैक्‍टोज़, सूक्रोज़ और फ्रूक्‍टोज़ पर अध्‍ययन किया।

अध्‍ययन में पाया गया कि सबसे ज्‍यादा हानिकारक प्रभाव फ्रूक्‍टोज़ के ही थे। मिश्रित शुगर खासतौर पर मिश्रित फ्रूक्‍टोज़ विशेष रूप से हाई फ्रूक्‍टोज़ कॉर्न सिरप और टेबल शुगर में मौजूद फ्रूक्‍टोज़ खतरनाक और कई तरह की बीमारियों का कारण बन सकता है। फ्रूक्‍टोज़ का संबंध खराब इंसुलिन लेवल और ग्‍लूकोज़ टॉलरेंस से होता है। शरीर में अधिक फ्रूक्‍टोज़ हो जाने की वजह से हानिकारक वसा जमने लगता है जोकि कई तरह की स्‍वास्‍थ्‍य संबंधित समस्‍याएं जैसे सूजन, उच्‍च रक्‍तचाप, पेट पर चर्बी का बढ़ना और डायबिटीज़ का कारण बनता है। इस स्‍टडी के अनुसार शुगर में मौजूद कैलोरी ज्‍यादा हानिकारक होती है।

विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि फल-सब्जियों में मौजूद फ्रूक्‍टोज़ का कोई हा‍निकारक असर नहीं होता है बल्कि फल और सब्जियां तो शरीर को कई तरह की बीमारियों और मधुमेह से बचाते हैं। लोगों को प्रोसेस्‍ड फूड की जगह डायटरी गाइडलाइंस पर ध्‍यान देना चाहिए और एडेड शुगर और फ्रूक्‍टोज़ की जगह साबुत फल और सब्जियों का सेवन करना चाहिए।

इन फूड्स से बढ़ जाता है ब्‍लड शुगर का स्‍तर

Picture credit : everydayhealth.com

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  • टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ों को अपने खाने से व्‍हाइट राइस को पूरी तरह से हटा देना चाहिए। एक रिसर्च में ये बात सामने आई है कि जो लोग सप्‍ताह में पांच बार या इससे ज्‍यादा बार व्‍हाइट राइस खाते हैं उनमें टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा ज्‍यादा पाया गया है जबकि जिन लोगों को व्‍हाइट की जगह ब्राउन राइस दिए गए उनमें इस बीमारी का खतरा 16 प्रतिशत तक कम पाया गया।
  • अगर आप रोज़ व्‍हाइट ब्रेड खाते हैं तो आपको सबसे ज्‍यादा डायबिटीज़ का खतरा है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि रिफाइंड आटे से बनी चीज़ें जैसे व्‍हाइट ब्रेड आदि को शरीर बहुत जल्‍दी पचा लेता है और जल्‍दी पचने की वजह से ये ब्‍लड शुगर को बढ़ा सकता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों ने होलग्रेन ज्‍यादा और थोड़ा रिफाइंड अनाज जिसमें व्‍हाइट ब्रेड भी शामिल था, खाया है उनका ब्‍लड शुगर लेवल ज्‍यादा पाया गया।
  • ब्‍लड शुगर को सामान्‍य स्‍तर पर रखने के लिए सोडा और शुगरयुक्‍त ड्रिंक्‍स से दूर रहना चाहिए। एक रिसर्च में शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग एक दिन में एक या दो बार शुगरयुक्‍त ड्रिंक पीते हैं उनमें टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा 26 प्रतिशत ज्‍यादा पाया गया। रेगुलर सोडा या शुगरी ड्रिंक की जगह आप पानी या नीबू पानी आदि पी सकते हैं। ये वजन कम करने में भी मदद करता है।
  • पूरी तरह से अपनी डाइट से रेड मीट को निकालना नहीं चाहिए लेकिन स्‍टडी कहती है बहुत ज्‍यादा रेड मीट और प्रोसेस्‍ड मीट खाने जैसे बैकन और कोल्‍ड कट जिनमें सैचुरेटेड फैट ज्‍यादा होता है, उनसे टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा ज्‍यादा रहता है। प्रोसेस्‍ड मीट जैसे हॉट डॉग, सॉसेज और 2 स्‍लाइस बैकन एक दिन में खाने से डायबिटीज़ का खतरा दोगुना हो जाता है। रेड मीट और प्रोसेस्‍ड मीट की जगह प्रोटीन के स्रोत जैसे नट्स और लो फैट डेयरी प्रोडक्‍ट्स खा सकते हैं।
  • बेक्‍ड फूड खाने से टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं और स्‍वस्‍थ लोग इससे ग्रस्‍त हो सकते हैं। ऐसे फूड्स खाने से आपको वजन कम करने में भी दिक्‍कत आ सकती है। दूसरी बात, इनमें ट्रांस फैट बहुत ज्‍यादा होता है जोकि बैड कोलेस्‍ट्रॉल को बढ़ाकर गुड कोलेस्‍ट्रॉल को कम कर देता है और इसकी वजह से जलन होती है जोकि मधुमेह का कारण बन सकता है।

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