डायबिटीज़ को असरकारी तरीके से कंट्रोल कर सकती है ‘पेरिविंकल टी’

Picture credit : bowlofherbs.com

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पेरिविंकल चाय यानि कैथेरेंथस रोसियस, डायबिटीज़ के ईलाज में प्राकृतिक नुस्‍खे की भूमिका निभाती है। इस कुसुमित जड़ी-बूटी को मडागास्‍कर पेरिविंकल भी कहा जाता है जिसका प्रयोग प्राचीन समय से ही औषधीय दवा के रूप में कई बाहरी और आंतरिक रोगों के ईलाज में किया जाता है। सबसे पहली बार पेरिविंकल का प्रयोग डायबिटीज़ के ईलाज में सन् 1920 में किया गया था जोकि इंसुलिन के पता चलने से भी पहले का समय है।

डायबिटीज़ के लिए पेरिविंकल

बांग्‍लादेश के माइमेनसिंह मेडिकल कॉलेज ने मडागास्‍कर पेरिविंकल का प्रयोग डायबिटीक चूहों पर किया था जिसमें पाया गया कि इस जड़ी-बूटी का डायबिटीज़ और नॉन डायबिटीक चूहों के ब्‍लड शुगर पर हाइपोग्‍लाइसेमिक प्रभाव पड़ा है। वहीं एक अन्‍य स्‍टडी में पेरिविंकल का प्रयोग खरगोशों पर किया गया था‍ जिसमें पता चला कि इससे उनमें ब्‍लड शुगर के स्‍तर को कम करने में मदद मिली है।

सामान्‍य और डायबिटीक दोनों तरह के पशुओं में पेरिविंकल ब्‍लड शुगर को कम करने में मदद करती है और इंसुलिन के प्रवाह को तेज करती है। इंसुलिन वो हार्मोन है जो शरीर में ब्‍लड शुगर के लेवल को कंट्रोल करता है।

पेरिविंकल के औषधीय लाभ

पेरिविंकल का प्रयोग कई तरह के कैंसर जैसे ल्‍यूकेमिया, होजकिन रोग, मैलिग्‍नेंट लिंफोमस, न्‍यूरोब्‍लास्‍टोमा और कपोसी सरकोमा के ईलाज में किया जाता है। इसका प्रयोग अल्‍ज़ाइमर रोग और हाई ब्‍लड प्रेशर और याद्दाश्‍त वापिस लाने में भी किया जाता है। पेरिविंकल सिरदर्द, वर्टिगो, खराब याद्दाश्‍त, डायरिया, कानों में सनसनाहट, दांतों से खून आना और भारी माहवारी से भी छुटकारा दिलाती है।

क्‍या पेरिविंकल जहरीली होती है

Picture credit : herbs-for-health.com

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इस बात का कोई सबूत नहीं है कि विंका मेजर जहरीली होती है। कैथेरेंथस रोसिया, मडागास्‍कर पेरिविंकल में एल्‍कालॉएड्स का समूह होता है जिसमें विंक्रिस्‍टाइन और विनब्‍लास्‍टिन दोनों होते हैं जिनका प्रयोग कीमोथेरेपी में किया जाता है। हालांकि, कीमोथेरेपी एक नियंत्रित जहर होता है।

पेरिविंकल का कैसे करते हैं प्रयोग

इस जड़ी-बूटी का जो हिस्‍सा ऊपर जमीन पर होता है उसका प्रयोग दवा बनाने में किया जाता है। मडागास्‍कर पेरिविंकल का इस्‍तेमाल डायबिटीज़, कैंसर और गले की खराश में किया जाता है। ये खांसी और फेफड़ों में दिक्‍कत की भी असरकारी दवा है।

पेरिविंकल चाय के दुष्‍प्रभाव

  • पेरिविंकल को डायटरी सप्‍लीमेंट या पेरिविंकल टी का सेवन करने से पहले अपने डॉक्‍टर या सेहत विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
  • पेरिविंकल के साथ दवाओं के संभावित हानिकारक प्रभाव के बारे में भी बात करें।
  • इस बात का भी ध्‍यान रखें कि डायबिटीज़ के लिए आप जिस पेरिविंकल चाय का इस्‍तेमाल कर रहे हैं वो विंका माइनर प्रजाति की तो नहीं है, क्‍योंकि ये बहुत जहरीली होती है।
  • कम से कम एक महीने तक इसका सेवन करें और फिर इसका असर ब्‍लड ग्‍लूकोज़ लेवल पर देखें।
  • नेल्‍सन मंडेला मेट्रोपोलिटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि पेरिविंकल विषैली होती हैं और ये एक असुरक्षित डायबिटीज़ नुस्‍खा है। इसके आगे वो बताते हैं कि ब्‍लड ग्‍लूकोज़ को बेहतर करने वाले एल्‍कालॉएड्स भी उच्‍च मात्रा में विषाक्‍त होते हैं जोकि आपकी सेहत को और भी ज्‍यादा खराब कर सकते हैं।
  • शोधकर्ताओं का कहना है कि पेरिविंकल डायबिटीज़ में फायदेमंद तो होती है लेकिन इसके प्रभाव को लेकर अभी और रिसर्च करने की जरूरत है।

कैसे बनाएं पेरिविंकल चाय

Picture credit : onlymyhealth.com

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पेरिविंकल चाय बनाने के लिए गर्म पानी में पेरिविंकल पत्तियों का पाउडर मिलाएं। इस घोल को 10 से 12 मिनट के लिए रख दें और इसके बाद इसे पी लें। रोज़ सुबह नाश्‍ते से पहले पेरिविंकल चाय का सेवन करें वरना इससे आपका पेट भी खराब हो सकता है।

डायबिटीज़ के मरीज़ों को चाय से मिलने वाले फायदे

  • प्रत्‍येक 10 में से 8 लोगों को उच्‍च रक्‍तचाप की समस्‍या और टाइप 2 डायबिटीज़ की बीमारी है और 10 में से 3 लोगों को टाइप 1 डायबिटीज़ है। ब्‍लैक और ग्रीन टी से रक्‍तचाप का स्‍तर सामान्‍य रखा जा सकता है।
  • मधुमेह के मरीज़ों में ह्रदय रोगों का खतरा सबसे ज्‍यादा रहता है। डायबिटीज़ के 80 प्रतिशत मरीज़ों की मृत्‍यु ह्रदय रोगों के कारण ही होती है। चाय के सेवन से ह्रदय कई तरह के स्‍वास्‍थ्‍यवर्द्धक लाभ होते हैं।
  • जिन लोगों को टाइप 2 डायबिटीज़ होने का खतरा है उन्‍हें एक दिन में तीन से पांच कप ब्‍लैक टी पीनी चाहिए। इससे टाइप 2 डायबिटीज़ का विकास रूक सकता है।
  • डायबिटीज़ कई तरह के कैंसर का भी कारण बन सकता है। इसमें पैंक्रियाटिक कैंसर, लिवर कैंस और एंडोमेट्रियल कैंसर शामिल है। रिसर्च के अनुसार चाय के सेवन से कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है।
  • कई रिसर्च में इस बात के संकेत दिए गए हैं कि चाय से इंसुलिन की संवेदनशीलता को सुधारा जा सकता है लेकिन इसमें दूध का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।

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