भारत में मुफ्त की दवा से जल्‍दी ठीक हो सकता है डायबिटीज़ : स्‍टडी

diabetes1

हाल ही में हुई एक स्‍टडी में यह बात सामने आई है कि भारत के गरीब परिवारों में मुफ्त ब्‍लड टेस्‍ट स्ट्रिप और इंसुलिन मुहैया करवाने से देश में मधुमेह को नियंत्रित एवं लोगों को जागरूक किया जा सकता है।

भारत में डायबिटीज़ को मैनेज करना काफी महंगा है इसलिए शोधकर्ता इस बात की जांच करना चाहते थे कि क्‍या दवाओं की कीमत कम कर देने से ब्‍लड शुगर के लेवल और मधुमेह से प्रभावित मरीज़ों की अवस्‍था में कोई बदलाव आता है या नहीं।

एक साल तक मध्‍यम और निम्‍न आय वाले परिवारों के 13 साल की उम्र तक के 85 बच्‍चों को फ्री डायबिटीज़ सप्‍लाई दिया गया। स्‍टडी के 6 महीने के अंदर ही हर 2 सप्‍ताह में प्रतिभागियों की संख्‍या कम होती पाई गई।

इस ट्रायल के अंत में शोधकर्ताओं ने पाया कि मरीज़ों में एचबी1एसी लेवल और अपनी अवस्‍था के प्रति समझ में भी बढ़ोत्तरी हुई है। यहां तक कि ये बदलाव सिर्फ 6 महीने में ही आ गया।

इस स्‍टडी के परिणामों के अंतर्गत शोधकर्ताओं का मानना है कि आत्‍म निरीक्षण से मरीज़ों में अपनी बीमारी औेर अवस्‍था के प्रति जागरूकता बढ़ जाती है।

जिन लोगों को डायबिटीज़ एक्‍सपर्ट द्वारा फोन किया गया उनमें बाकी लोगों की तुलना में डायबिटीज़ के प्रति जानकारी ज्‍यादा पाई गई। लेकिन इन दो गुटों के ब्‍लड शुगर लेवल में कोई अंतर नहीं पाया गया। एक अध्‍ययन में यह भी पाया गया कि टेलिहैल्‍थ प्रोग्राम से बड़ी आसानी से टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ों में ब्‍लड शुगर को कंट्रोल किया जा सकता है। अगर आप खुद ही अपनी डायबिटीज़ को कंट्रोल करते हैं तो इससे ना केवल आपको डॉक्‍टर के पास जाने की जरूरत है बल्कि इससे आपके शरीर में ब्‍लड ग्‍लूकोज़ का स्‍तर भी नियंत्रित रहता है।

स्‍टडी के प्रमुख शोधकर्ता प्रोफेसर विजयलक्ष्‍मी भाटिया का कहना है कि आर्थिक कारणों की वजह से भी अधिकतर मरीज़ डायबिटीज़ का ठीक तरह से ध्‍यान नहीं रख पाते हैं जिसका उल्‍टा असर उनकी सेहत पर पड़ता है।

इस स्‍टडी के परिणाम अनुसार अगर मरीज़ों को निशुल्‍क चिकित्‍सा मुहैया करवाई जाए तो डायबिटीज़ को आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है। इससे विकासशील देशों के मध्‍यम और निम्‍न आय वर्ग के बच्‍चों और टाइप 1 डायबिटीज़ के किशोर मरीज़ों को फायदा होगा।

भारत में 30 मिलियन से भी ज्‍यादा लोगों को डायबिटीज़ की बीमारी है। भारत के शहरी इलाकों में सीपीआर (क्रूड प्रेवलेंस रेट) 9 प्रतिशत माना जाता है। ग्रामीण इलाकों में कुल आबादी का सीपीआर लगभग 3 प्रतिशत है।

वर्तमान समय में भारत की कुल आबादी 1000 मिलियन से भी ज्‍यादा हो चुकी है और आबादी बढ़ने के साथ-साथ मधुमेह की समस्‍या भी बढ़ती जा रही है।

भारत में मधुमेह की वास्तविक संख्या का अनुमान 40 मिलियन है। इसका मतलब है कि भारत में दुनियाभर के अन्‍य देशों की तुलना में मधुमेह रोगियों की संख्‍या काफी ज्‍यादा है। अस्पष्ट ग्लूकोज सहिष्णुता (आईजीटी) भी भारत में एक बढ़ती समस्या है।

एक अनुमान के अनुसार आईजीटी का प्रसार शहरी क्षेत्रों में लगभग 8.7 प्रतिशत और ग्रामीण इलाकों में 7.9 प्रतिशत है। माना जा रहा है कि आईजीटी के 35 प्रतिशत लोगों में टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा पनप रहा है। इस वजह से भारत को स्‍वास्‍थ्‍य की दृष्टि से बहुत बड़े संकट का सामना करना पड़ सकता है।

भारत में पश्चिमी देशों के मुकाबले मधुमेह में काफी भिन्‍नता है।

डायबिटीज़ से बचने के टिप्‍स

  • ओवरवेट होने पर मधुमेह का खतरा कई गुना बढ़ जाता है इसलिए अपने वजन को नियंत्रित रखें।
  • जिन फूड्स में ट्रांस फैट यानि की हाइड्रोजेनरेटेड फैट, प्रोसेस्‍ड फूड और शुगर ज्‍यादा होता है उनसे दूर रहें। कॉम्‍प्‍लेक्‍स कार्बोहाइड्रेट्स में फाइबर प्रचुर मात्रा में होता है। इन्‍हें पचने में थोड़ा समय लगता है और इस वजह से ये लंबे समय तक ऊर्जा का बेहतर स्रोत बन सकते हैं।
  • शुगरयुक्‍त बेवरेज़ेज़ को अपनी डाइट से हटाकर आप कई तरह की बीमारियों से बच सकते हैं।
  • रोज़ाना कम से कम 7-8 गिलास पानी जरूर पीएं।
  • एक्‍सरसाइज़ से कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति ज्‍यादा संवेदनशील हो जाती है। जो लोग बिलकुल भी एक्‍सरसाइज़ नहीं करते हैं उनमें डायबिटीज़ के साथ-साथ अन्‍य बीमारियों का खतरा भी दोगुना हो जाता है।
  • तनाव की वजह से कई तरह के हार्मोन रिलीज़ होते हैं जिससे ब्‍लड शुगर का स्‍तर बढ़ जाता है इसलिए तनाव से दूर रहें।
  • बेहतर नींद ना ले पाने की स्थिति में डायबिटीज़ और ओबेसिटी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। सोने के लिए एक तय वक्‍त रखें और पर्याप्‍त नींद लें।
  • अपने भोजन में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम रखें और साबुत अनाज, मछली, चिकन और लो फैट डेयरी प्रॉडक्‍ट्स का सेवन करें। वजन को नियंत्रित रखने के लिए हर चीज़ को संतुलित मात्रा में खाएं।
  • दिन में दो बार खाने की बजाय थोड़ी-थोड़ी देर में खाने की आदत डालें। थोड़े-थोड़े समय के अंतराल में स्‍नैक्‍स खाने से ब्‍लड शुगर का स्‍तर संतुलित रहता है।
  • ह्रदय को स्‍वस्‍थ रखने के लिए एरोबिक एक्‍सरसाइज़ जैसे जॉगिंग और साइक्‍लिंग आदि करें। इस तरह की एक्‍सरसाइज़ अपने डॉक्‍टर से सलाह लेने के बाद ही करें।

Read source

Image source

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *