आपको डायबिटीज़ का मरीज़ बनने से बचा सकता है ये सस्‍ता सा मसाला

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पैंक्रियाज़ के पर्याप्‍त मात्रा में इंसुलिन ना बनने या इंसुलिन के प्रति रिएक्‍ट ना करने पर टाइप 2 डायबिटीज़ की बीमारी से व्‍यक्‍ति ग्रस्‍त हो जाता है।

इस हार्मोन के पर्याप्‍त मात्रा में ना होने के कारण मरीज़ को शरीर में रक्‍त में मौजूद ग्‍लूकोज़ को एनर्जी में बदलने में दिक्‍कत आने लगती है।

डायबिटीज़ के लक्षणों में ज्‍यादा प्‍यास लगना, बार-बार भूख लगना और बार-बार मूत्र आना आदि शामिल है।

क्‍या है समस्‍या

टाइप 2 मधुमेह के रोगियों में इंसुलिन तो बनता है लेकिन वो शरीर के लिए पर्याप्‍त नहीं होता है। इंसुलिन की मदद से शरीर की कोशिकाओं तक ग्‍लूकोज़ पहुंच पाता है और जब पर्याप्‍त मात्रा में इंसुलिन नहीं बन पाता तो ग्‍लूकोज़ की आपूर्ति ना हो पाने पर शरीर में ऊर्जा की कमी हो जाती है। इसे इंसुलिन प्रतिरोध कहते हैं।

किसे है खतरा

खराब जीवनशैली के साथ-साथ अधिक वजन वाले लोगों में भी इस बीमारी का खतरा रहता है। व्‍यायाम और खानपान पर ध्‍यान रखकर इस बीमारी को नियंत्रित रखा जा सकता है। अगर तब भी ब्‍लड शुगर का स्‍तर ज्‍यादा रहे तो दवाओं के प्रयोग से शरीर में पर्याप्‍त मात्रा में इंसुलिन बनाने का कार्य किया जाता है। कुछ मामलों में इंसुलिन के इंजेक्‍शन भी दिए जाते हैं।

कौन सा है मसाला

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अगर आप अपने खाने में पैपरिका यानि लाल शिमला मिर्च को शामिल करें तो आप टाइप 2 डायबिटीज़ की बीमारी से बच सकते हैं। ये ब्‍लड शुगर के हाई होने के खतरे को कम करता है।

पैपरिका ब्‍लड शुगर को लो एवं नियंत्रित रखने में मदद करती है।

कुछ तरह के मसाले जैसे लाल, पीली और हरी शिमला मिर्च मे कैपसाइसिन होता है। कैपसाइसिन ग्‍लूकोज़ मेटाबॉलिज्‍म को बूस्‍ट कर इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाती है।

लाल शिमला मिर्च के अलावा लाल मिर्च में भी कैपसाइसिन होता है इसलिए आप अपने आहार में इन दोनों चीज़ों को शामिल कर सकते हैं।

कई अन्‍य पोषक तत्‍वों से भरपूर खाद्यों और मसालों की तरह पैपरिका में भी ब्‍लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने और डायबिटीज़ का ईलाज करने की क्षमता है।

जब डायबिटीज़ का मरीज़ कैपसाइसिन युक्‍त पैपरिका खाता है तो इससे उसका पाचन भी दुरुस्‍त होता है और रक्‍त में शुगर की प्रक्रिया भी बेहतर हो पाती है।

अपनी डाइट में ज्‍यादा पैपरिका को शामिल करने से कैंसर, ऑटोइम्‍यून रोग और कार्डियोवस्‍कुलर आदि रोगों को ठीक करने में मदद मिलती है। इसमें एंटीऑक्‍सीडेंट्स होते हैं जो आंखों को क्षतिग्रस्‍त होने से भी बचाते हैं।

स्‍वस्‍थ और संतुलित आहार लेने से भी मधुमेह की बीमारी से बचा जा सकता है। नियमित एक्‍सरसाइज़ और रेगुलर ब्‍लड टेस्‍ट से ब्‍लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। वहीं ब्‍लड शुगर के बढ़ते स्‍तर का ईलाज ना किया तो कई खतरनाक मुश्किलें जैसे कार्डियोवस्‍कुलर रोग और किडनी फेल्‍योर तक हो सकती है।

जैसे कि हमने पहले भी बताया कि नियमित व्‍यायाम से टाइप 2 डायबिटीज़ को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। आइए जानते हैं कि इस बीमारी को नियंत्रित रखने के लिए कौन से योगासन कारगर होते हैं :

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कपालभाति

सांस लेने की इस प्रक्रिया में नर्वस सिस्‍टम को एनर्जी मिलती है और मस्तिष्‍क की कोशिकाएं रेजुवनेट होती हैं। मधुमेह रोगियों के लिए ये आसन बहुत लाभकारी है। इससे पेट के अंग उत्तेजित होते हैं। इस प्राणायाम से रक्‍त संचार भी बेहतर हो पाता है।

सुप्‍त मत्‍स्‍येंद्रासन

लेटकर शरीर को ट्विस्‍ट करने से अंदरूनी अंगों की मालिश होती है और पाचन तंत्र बेहतर होता है। इस आसन में पेट के अंगों पर भी दबाव पड़ता है और इसलिए ये योगासन डायबिटीज़ के रोगियों के लिए फायदेमंद होता है।

धनुरासन

इस आसन से अग्‍नाश्‍य को मजबूती मिलती है और ये आसन मधुमेह के रोगियों के लिए अत्‍यंत लाभकारी होता है। इससे पेट की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और तनाव में भी कमी आती है।

पश्चिमोत्तासन

इस आसन से पेट और पेल्विक के अंग मजबूत बनते हैं और इससे मधुमेह रोगियों को लाभ मिलता है। ये आसन शरीर में प्राण को संतुलन प्रदान करता है और इससे मस्तिष्‍क भी शांत रहता है।

अर्ध मत्‍स्‍येंद्रासन

इससे फेफड़ों को ज्‍यादा ऑक्‍सीजन मिल पाता है और रीढ़ की हड्डी मजबूत बनती है। रक्‍त संचार बेहतर होता है और दिमाग शांत रहता है।

शवासन

इस आसन में शरीर ध्‍यान अवस्‍था में होता है। इससे शरीर के सभी अंगों को आराम मिलता है।

मधुमेह रोगियों को योग करने से लाभ

  • इससे पाचन तंत्र, संचार और इम्‍युनिटी बेहतर हो पाती है।
  • योग तंत्रिका तंत्र और एंडोक्राइन अंगों के कार्य को बढ़ाता है।
  • योग से कई तरह के घातक रोगों से बचा जा सकता है।
  • इससे पूरे शरीर का स्‍वस्‍थ रखा जा सकता है।

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