मधुमेह की वजह से क्‍यों होती है घाव भरने में देरी

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डायबिटीज़ की वजह से घाव भरने में समय लगता है। इस वजह से डायबिटीज़ के मरीज़ों में संक्रमण या अन्‍य किसी समस्‍या का खतरा बढ़ जाता है।

अगर आपकी डायबिटीज़ कंट्रोल में है तो आपके घाव आसानी से भर जाते हैं और आप किसी भी तरह के गंभीर संक्रमण से बच जाते हैं।

डायबिटीज़ और घाव का भरना

छोटे घाव, कट और जलना, ये सब कभी भी हो जाता है लेकिन डायबिटीज़ के मरीज़ों में ये गंभीर सेहत समस्‍या होती है।

मुधमेह के कई मरीज़ों में घाव धीरे से भरते हैं या फिर कभी नहीं भरते। अगर मरीज़ों में घाव नहीं ठीक हो पा रहा है तो इसमें संक्रमण हो सकता है।

ये संक्रमण टिश्‍यू और हड्डियों के साथ-साथ आसपास के हिस्‍सों को भी प्रभावित करती है। कुछ मामलों में तो ये स्थिति बहुत घातक हो जाती है।

डायबिटीज़ के 15 प्रतिशत मरीज़ों में फुट अल्‍सर की समस्‍या रहती है। ये दर्द देने वाले छाले धीरे-धीरे घाव का रूप ले लेते हैं।

अगर घाव पर संक्रमण ना भी हो तो ये आपकी सेहत और जीवन स्‍तर को प्रभावित करता है। पैरों में कट या चोट की वजह से मरीज़ को चलने और एक्‍सरसाइज़ करने में दर्द होता है।

मधुमेह को कंट्रोल करके आप घाव को देरी से भरने और इससे संबंधित अन्‍य दिक्‍कतों से बच सकते हैं जिसमें फुट अल्‍सर भी शामिल है।

साल 2013 में हुई एक स्‍टडी में ब्‍लड ग्‍लूकोज़ और घाव के भरने के बीच संबंध पाया गया। मधुमेह के कारण हुए घावों के लिए सर्जरी करवाने वाले लोगों में ब्‍लड ग्‍लूकोज़ लेवल के नियंत्रित होने पर सर्जरी के दौरान भी घाव तेजी से भरते पाए गए।

घावों पर क्‍यों पड़ता है मधुमेह का असर

डायबिटीज़ की वजह से शरीर में ब्‍लड ग्‍लूकोज़ के स्‍तर को संतुलित रख पाना बहुत मुश्किल हो जाता है। जब ब्‍लड ग्‍लूकोज़ घातक रूप से बढ़ता है तो ये सफेद रक्‍त कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगता है और इस वजह से बैक्‍टीरिया से लड़ने में ये असमर्थ हो जाती हैं।

अगर मधुमेह को नियंत्रित ना किया जाए तो इससे रक्‍त प्रवाह भी बाधित होता है। प्रवाह कम होने से लाल रक्‍त कोशिकाओं की क्रिया धीमी हो जाती है। इसे वजह से भी घाव से जरूरी पोषण पहुंच पाने में दिक्‍कत होती है। परिणामस्‍वरूप, घाव धीरे से भरते हैं या फिर भरते ही नहीं हैं।

घाव ना भरने की स्थिति में नर्व डैमेज भी होता है। अगर मधुमेह को नियंत्रित ना किया जाए तो शरीर में नसों को भी नुकसान पहुंचाना शुरु कर देती हैं। मधुमेह के मरीज़ों को बिना कोई चोट लगे ही पैरों में घाव होने लगने हैं। घाव को और ज्‍यादा गंभीर होने से बचाने के लिए समय रहते ही सही ईलाज मिल जाए तो बेहतर रहता है।

मधुमेह के मरीज़ों में पसीना आना, शुष्‍क और फटी त्‍वचा, पैरों के नाखूनों में संक्रमण और पैरों में भद्दापन आदि की समस्‍या देखी जाती है जिससे बैक्‍टीरियल इंफेक्‍शन का खतरा बढ़ जाता है।

मधुमेक के अलावा घाव बनने के कई और भी कारण हैं तो इस प्रकार हैं :

  • हार्मोंस के कम उत्‍पादन की वजह से भी घाव भरने में देर लगती है।
  • नई रक्‍त कोशिकाओं के कम उत्‍पादन या उनकी मरम्‍मत के कारण।
  • कोलाजन के कम उत्‍पादन की वजह से।

समस्‍याएं

मधुमेह के सर्कुलेट्री और न्‍यूरोलॉजिकल प्रभाव के कारण भी घाव भरने में समय लगाते हैं और इस वजह से समस्‍या और ज्‍यादा गंभीर हो सकती है। इसकी वजह से ह्रदय रोग, किडनी रोग और आंखों से संबंधित समस्‍या हो सकती है।

अगर घाव का ईलाज ना किया जा तो इसमें संक्रमण फैल सकता है और ये मांसपेशियों और हड्डियों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। इसे ओस्टिमाइलेटिस कहा जाता है।

अगर संक्रमण रक्‍त कोशिकाओं तक फैल जाए तो इसे सेप्सिस कहते हैं और ये जान के लिए खतरा भी हो सकता है। संक्रमण के गहरा होने पर उस अंग को काटना तक पड़ सकता है।

क्‍या है बचाव

  • डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए नियमित चेकअप बहुत जरूरी है और आपको अपने पैरों की देखभाल करना बहुत जरूरी है। नियमित चेकअप से मधुमेह के मरीज़ अपनी स्थिति को मॉनिटर कर सकते हैं।
  • मधुमेह के मरीज़ों को अपने पैरों का खास ख्‍याल रखना चाहिए क्‍योंकि इस बीमारी की वजह से उनके पैर बहुत ज्‍यादा संवेदनशील हो जाते हैं और बाकी अंगों की तरह मधुमेह का असर पैरों पर भी पड़ता है।
  • रोज़ पैर धोएं
  • पैरो को सुखाकर उन पर मॉइश्‍चराइजिंग लोशन लगाएं
  • नंगे पैर ना घूमें
  • पैरों के नाखून काटना ना भूलें
  • पैरों की जांच करते रहें।

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