डायबिटीज़ के मरीज़ों को ये बुरी आदतें लगती हैं हैल्‍दी

bad habits

डायबिटीज़ को नियंत्रित रखने में संतुलित आहार अहम भूमिका निभाता है। आपकी छोटी सी चूक भी भयंकर तरीके से आपके ब्‍लड शुगर लेवल को बढ़ा सकती है। हालांकि, डायबिटीज़ के अधिकतर मरीज़ इस बात को नहीं समझ पाते हैं कि वो किस तरह बिना किसी की मदद के खुद ही इस बीमारी को कंट्रोल कर सकते हैं।

डाइट में की गई कुछ गलतियां उनकी हालत और बीमारी दोनों को ही गंभीर बना देती हैं। आज हम आपको डाइट से जुड़ी कुछ गलतियों के बारे में बताने जा रहे हैं जो हर मरीज़ करता ही होगा। आपको अब तक लगता होगा कि आपकी ये आदतें आपकी सेहत के लिए अच्‍छी हैं लेकिन असल में ऐसा नहीं है।

तो चलिए जानते हैं कि डायबिटीज़ के मरीज़ों को अपनी डाइट से जुड़ी किन गलतियों से बचना चाहिए।

उपमा और पोहा जैसी कार्बोहाइड्रेट युक्‍त चीज़ों को नाश्‍ते में करें शामिल

कार्बोहाइड्रेट के मामले में डायबिटीज़ के हर मरीज़ को बहुत सावधान रहना चाहिए। जी हां, कॉम्‍प्‍लेक्‍स कार्बोहाइड्रेट, सिंपल कार्बोहाइड्रेट्स की तुलना में ज्‍यादा बेहतर होते हैं। इसमें उपमा और पोहा सबसे सेहतमंद विकल्‍प है। चूंकि सूजी और रवा प्रोसेस्‍ड होता है इसलिए जब आप उपमा को पकाते हैं तो इससे ब्‍लड शुगर लेवल के बढ़ने का खतरा रहता है। इसी तरह पोहा चावल से बना होता है और चावल से बनी कोई भी चीज़ शुगर लेवल को बिगाड़ सकती है। आपको अब तक लगता होगा कि पोहा और उपमा सेहतमंद होते हैं लेकिन ऐसा नहीं है। इनमें थोड़ा बदलाव कर आप मधुमेह रोगियों के लिए इन्‍हें हैल्‍दी बना सकते हैं। इसकी जगह डोसा बेहतर होता है, हालांकि वो भी चावल से बना होता है लेकिन उसमें दाल भी होती है और सांभर के साथ खाने पर वो ब्‍लड शुगर पर असर नहीं करता है।

पानी निकालने से चावल हो जाते हैं सेहहतमंद

भारतीय परिवारों में लगभग सभी चावल का सेवन करते हैं लेकिन मधुमेह रोगियों के लिए ये नुकसानदायक होता है। मधुमेह रोगियों को ये बात पता होनी चाहिए कि उन्‍हें सर्व किए गए चावल को अलग तरीके से बनाया जाना चाहिए। पकाए गए चावल से अतिरिक्‍त पानी को निकालकर सेवन करने से ये कम नुकसानदायक होता है लेकिन फिर उसमें मौजूद स्‍टार्च भी नुकसान करता है जिससे आपका ब्‍लड शुगर लेवल बढ़ सकता है। चावल से पानी को निकालने से उसमें मौजूद छोटे विटामिंस और मिनरल्‍स भी निकल जाते हैं।

प्राकृतिक जूस से नहीं होता नुकसान

प्राकृतिक जूस का मतलब है कि उनमें प्राकृतिक शुगर भी होगी जिससे ब्‍लड शुगर बढ़ सकता है। इससे बेहतर होगा कि आप साबुत फलों का सेवन करें जिससे आपको उनमें मौजूद फाइबर और कई तरह के विटामिंस मिल सकें। एक रिसर्च में इस बात खुलासा हुआ है कि सुबह नाश्‍ते में अधिक मात्रा में फलों का रस पीने से टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा बढ़ जाता है। आप दो गिलास जूस पीने की जगह एक साबुत फल खा सकते हैं। फलों का रस निकालने पर उनमें शुगर की मात्रा बढ़ जाती है इसलिए जूस की जगह फल खाना ज्‍यादा फायदेमंद रहता है। फलों और हरी सब्जियां खाने से मधुमेह का खतरा कम रहता है क्‍योंकि इनमें फाइबर और माइक्रोन्‍यूट्रिएंट पाए जाते हैं।

नारियल पानी मधुमेह रोगियों के लिए होता है अच्‍छा

नारियल पानी आपकी सेहत के लिए अच्‍छा हो सकता है लेकिन मधुमेह के मरीज़ों के लिए नहीं। इससे बड़ी तेजी से शुगर लेवल बढ़ता है।

खाने के बाद फल खाना है बेस्‍ट डेज़र्ट

अगर आप भी ऐसा सोचते हैं तो आपसे बड़ा नादान और कोई नहीं है। भारतीय खाने में कार्बोहाइड्रेट बहुत होता है इसलिए अगर आप खाने के तुरंत बाद फ्रूट खाते हैं इससे आपका शुगर लेवल बहुत बुरी तरह से बढ़ सकता है। इसकी जगह आप भोजन के बीच-बीच में फलों का स्‍नैक के रूप में सेवन कर सकते हैं।

मलाई बर्फी से डायबिटीक मिठाई है बेहतर

डायबिटीज़ के मरीज़ मीठा खाने के लिए बहुत ललचाते हैं। ऐसी कोई भी मिठाई नहीं है जिसमें शुगर की मात्रा कम हो। डायबिटीज़ के मरीज़ों पर कार्डियोवस्‍कुलर रोगों का खतरा भी मंडराता रहता है। डायबिटीक मिठाई में सैचुरेटेड फैट बहुत ज्‍यादा होता है और ये आपकी सेहत को बिगाड़ सकता है। अगर आप एक ही बार में 3 अंजीर खा लेते हैं तो आप एक मलाई बर्फी जितना ही अपना नुकसान करते हैं।

अब तक आपको लगता होगा कि ये आदतें डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए अच्‍छी होती हैं लेकिन ऐसा नहीं है। मधुमेह रोगियों के लिए अपनी डाइट का ध्‍यान रखना बहुत जरूरी है। इन बातों को आप भी बिलकुन ना भूलें।

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