जानें डायबिटीक केटोएसिडोसिस के लक्षण और इसका ईलाज

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डायबिटीज़ केटोएसिडोसिस, केटोसिस के प्राकृतिक स्‍तर की तरह ना होकर एक हैल्‍थ एमरजेंसी होती है। आइए जानते हैं इस अवस्‍था के कारणों और लक्षण के साथ-साथ इसके बचाव के बारे में।

मधुमेह की बीमारी संतुलित आहार और बताई गई दवा लेने से ज्‍यादा है। इसमें स्‍वस्‍थ रहने के लिए इंसुलिन की भूमिका को जानना जरूरी होता है और अगर आप ये बात जान लें तो बड़ी आसानी से डायबिटीज़ से जुड़ी दिक्‍कतों से छुटकारा पा सकते हैं।

इंसुलिन और मधुमेह के बीच में संबंध

इंसुलिन एक आवश्यक, प्राकृतिक रूप से स्रावित होने वाला हार्मोन है जिसकी शरीर को बहुत जरूरत होती है। शरीर में इंसुलिन के कम बनने, बिगड़ने या खत्‍म होने की स्थिति में मनुष्‍य का शरीर ठीक तरह से काम नहीं कर पाता है।

जबकि इंसुलिन रेसिस्‍टेंस एक ऐसी अवस्‍था में जिसमें कोशिकाएं प्रभावी तरीके से इंसुलिन का प्रयोग नहीं कर पाती हैं, अपर्याप्त इंसुलिन स्वयं इंसुलिन प्राप्त करने से कोशिकाओं को रोकता है। टाइप 2 डायबिटीज़ में इंसुलिन रेसिस्‍टेंस सामने आता है जबकि टाइप 1 डायबिटीज़ में पर्याप्‍त इंसुलिन नहीं बन पाता है।

डायबिटीज़ की वजह से ब्‍लड शुगर का स्‍तर अनियंत्रित हो जाता है जोकि आपकी सेहत के लिए कोई बड़ा खतरा बन सकता है।

केटोसिस क्‍या होता है और सेहत पर इसका असर

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अगर आप टाइप 2 डायबिटीज़ के शिकार हैं तो आपको पता होगा कि ब्‍लड शुगर को संतुलित करने का सबसे सही तरीका है डाइट में से कार्ब को कम करना जिसे बॉडी बहुत जल्‍दी शुगर में परिवर्तित कर लेती है।

जब आप अपने आहार में कार्ब को हटाकर जैसे कि हाई फैट, लोग कार्ब कीटो डाइट लेते हैं, उदाहरण के रूप में : आपकी बॉडी केटोसिस के स्‍तर पर जहां आप एनर्जी के लिए कार्ब की बजाय फैट बर्न करने पर ज्‍यादा ध्‍यान देते हैं। केटोसिस शरीर में कीटोंस रिलीज़ करता है जिससे जल्‍दी वजन घटने लगता है। जब बॉडी में एनर्जी के लिए फैट बर्न होता है तो लिवर कीटोंस नामक एसिड का उत्‍पादन करते हैं।

कीटोंस अधिकतर ज्‍यादा परेशानी खड़ी नहीं करते हैं क्‍योंकि इस एसिड के उत्‍पादन को धीमा करने के लिए शरीर ज्‍यादा इंसुलिन का उत्‍पादन करने लगता है। दिक्‍कत तब आती है जब इस काम को करने के लिए पर्याप्‍त इंसुलिन मौजूद नहीं होता है। ऐसा आमतौर पर टाइप 1 डायबिटीज़ में होता है, टाइप 2 डायबिटीज़ में ऐसा बहुत ही कम देखने को मिलता है।

कीटोंस के स्‍तर के बहुत ज्‍यादा बढ़ने पर रक्‍त में एसिड प्रवेश कर सकता है और इस वजह से डायबिटीक केटोएसिडोसिस की अवस्‍था तक आ सकती है। ये एक खतरनाक हैल्‍थ इमेरजेंसी है जिसमें तुंरत मेडिकल हैल्‍प की जरूरत होती है और ये केटासिस से पूरी तरह से अलग है।

मधुमेह केटोएसिडोसिस की चेतावनी के लक्षण और सामान्‍य लक्षण

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डायबिटीक केटोएसिडोसिस बहुत तेजी से बढ़ता है इसलिए आपको पहले से ही इसके लक्षणों के बारे में पता होना चाहिए।

  • इस बीमारी का सबसे पहला लक्षण है कि इसमें बहुत ज्‍यादा प्‍यास लगती है और बार-बार पेशाब आता है। अगर आपको ऐसा कोई लक्षण दिखाई दे रहा है तो तुरंत अपना ब्‍लड शुगर लेवल चैक करें। अगर आपका ब्‍लड शुगर लेवल 230 मिलीग्राम प्रति डेसिलिटर से ज्‍यादा है तो आपको यूरिन स्ट्रिप से अपना केटोन लेवल भी चैक करना चाहिए।
  • सामान्‍य केटोन लेवल 0.6 मिलिमोल्‍स प्रति लीटर से कम होता है। इसका 1.6 से 3.0 एममएओएल/एल के बीच का होने का मतलब है कि आप डायबिटीक केटोएसिडोसिस के खतरे में हैं। 3.0 एममएओएल/एल और इससे ज्‍यादा का लेवल दर्शाता है कि आपको मेडिकल इमेरजेंसी की जरूरत है।
  • डॉक्‍टर द्वारा बताया गया इंसुलिन लें और पानी पीएं। इससे आपको केटोन लेवल बढ़ने पर थोड़ा बेहतर महसूस हो सकता है। इंसुलिन लेने के बाद आपकी बॉडी दोबारा से शुगर को अवशोषित कर पाने में सक्षम हो जाएगी। तब तक पानी पीने से आपको मूत्र आ जाएगा और शरीर में मौजूद अतिरिक्‍त केटोंस बाहर निकल जाएंगें।

अगर आप अपना ब्‍लड शुगर कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं या आपका केटोन लेवल असुरक्षित स्‍तर तक पहुंच गया है तो आपको डायबिटीक केटोएसिडोसिस के इन लक्षणों पर भी ध्‍यान देना चाहिए :

  • तेज और गहरी सांसे लेना
  • सांसों से फ्रूटी गंध आना
  • पेट में दर्द होना
  • कुछ समझ ना आना
  • उल्‍टी या डायरिया
  • आंखों से कम दिखाई देना

डायबिटीक केटोएसिडोसिस के जोखिम के कारण

डायबिटीक केटोएसिडोसिस का प्रमुख कारण टाइप 1 डायबिटीज़ है क्‍योंकि इसमें शरीर इंसुलिन का उत्‍पादन करना बंद कर देता है। टाइप 2 डायबिटीज़ में फिर भी इंसुलिन का उत्‍पादन होता है इसलिए इस अवस्‍था में ऐसा नहीं होता है। अगर आप अपना इंसुलिन का डोज़ लेना भूल जाते हैं या किसी वजह से इसे नहीं ले पाते हैं तो आपमें डायबिटीक केटोएसिडोसिस का खतरा बढ़ जाता है।

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