जानिए क्‍यों मधुमेह रोगियों के लिए जरूरी है ग्‍लाइसेमिक इंडेक्‍स

What-Is-Glycemic-Index

ग्‍लाइसेमिक इंडेक्‍स यानि जी आई से खाद्य पदार्थों में उपलब्‍ध कार्बोहाइड्रेट से ब्‍लड ग्‍लूकोज़ पर पड़ने वाले असर की मात्रा को मापा जाता है। इस इंडेक्‍स में फूड्स को रैंक किया जाता है कि उनका ब्‍लड शुगर के लेवल पर क्‍या असर पड़ेगा।

जिन खाद्यों में जी आई का लेवल ज्‍यादा होता है वो मध्‍यम या लो जीआई वाले फूड्स की तुलना में ब्‍लड ग्‍लूकोज़ को ज्‍यादा तेजी से बढ़ाते हैं। डायबिटीज़ के मरीज़ों को अपने आहार में ऐसे खाद्यों को चुनना चाहिए जिनमें लो और मीडियम जीआई हो। अगर आप हाई जीआई वाले फूड खाते हैं तो इसको संतुलित करने के लिए आपको लो जीआई फूड खाने चाहिए।

कार्बोहाइड्रेट युक्‍त फूड्स जिनमें लो जीआई होता है जैसे कि सूखे बींस और दालें और नॉन स्‍टार्च फूड और कुछ स्‍टार्च युक्‍त सब्जियां जैसे शकरकंद, फल और होलग्रेन ब्रेड और अनाज (गेहूं, होलव्‍हीट व्‍हाइट ब्रेड आदि)।

मीट और फैट में जीआई नहीं होता है क्‍यों इसमें कार्बोहाइड्रेट उपलब्‍ध नहीं होता है।

नीचे दिए गए फूड्स जीआई पर आधारित हैं :

लो जीआई फूड्स (55 और इससे कम)

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  • होलव्‍हीट ब्रेड
  • ओटमील, ओट ब्रान, मूसली
  • पास्‍ता, कनवर्टेड राइस, गेहूं, बुल्‍गर
  • शकरकंद, कॉर्न, लिमा, बटर बींस, मटर, दालें
  • कई तरह के फल, नॉन स्‍टार्च सब्जियां और गाजर

मध्‍यम जीआई (56-69)

  • साबुत अनाज, राई ओर पीटा ब्रेड
  • क्‍विक ओट्स
  • ब्राउन और बासमती राइस

हाई जीआई (70 और इससे ज्‍यादा)

  • व्‍हाइट ब्रेड और बेगल
  • कॉर्नफ्लेक्‍स, पफ्ड राइस, ब्रान फ्लेक्‍स, इंस्‍टेंट ओटमील
  • राइस पास्‍ता मैक्रॉनी और चीज़
  • रूसेट आलू, कद्दू
  • तरबूज और अन्‍नानास

फूड के जीआई का क्‍या पड़ता है असर

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वसा और फाइबर भोजन के जीआई को कम करते हैं। सामान्‍य नियम के अनुसार जितना ज्‍यादा आप किसी खाद्य को पकाएंगें या प्रोसेस्‍ड करेंगें उतना ही ज्‍यादा उसमें जीआई की मात्रा बढ़ेगी। हालांकि, हर बार ये सत्‍य नहीं होता है।

नीचे अन्य कारकों के कुछ विशिष्ट उदाहरण हैं जो भोजन के जीआई को प्रभावित कर सकते हैं:

परिपक्‍व और संग्रहण का समय : कोई फल जितना ज्‍यादा पका हुआ होगा उसमें उतना ही ज्‍यादा जीआई होगा।

प्रोसेसिंग : साबुत फलों की तुलना में जूस में जीआई ज्‍यादा होता है। मैश किए गए आलू में बेक किए गए आलू की तुलना में जीआई ज्‍यादा होता है। स्‍टोन ग्राउंड होलव्‍हीट ब्रेड में होलव्‍हीट ब्रेड की तुलना में जीआई लो होता है।

कुकिंग प्रक्रिया : जितना ज्‍यादा आप किसी फूड को पकाएंगें उसमें उतना ही ज्‍यादा जीआई होगा।

वैरायटी : लंबे अनाज सफेद चावल में ब्राउन राइस की तुलना में जीआई कम होता है लेकिन छोटे अनाज व्‍हाइट राइस में ब्राउन राइस की तुलना में जीआई ज्‍यादा होता है।

अन्‍य बातें

जीआई वैल्‍यू खाने में मौजूद कार्बोहाइड्रेट के टाइप को दर्शाता है लेकिन इसमें खाए गए कार्बोहाइड्रेट के बारे में कुछ नहीं होता है। ब्‍लड ग्‍लूकोज़ को नियंत्रित करने के लिए पोर्शन साइज़ भी जरूरी होता है और वजन को संतुलित या घटाने में भी ये अहम भूमिका निभाता है।

किसी भी फूड का जीआई रेट अकेले खाने या किसी अन्‍य फूड के साथ खाने पर बदल जाता है। अगर आप कोई हाई जीआई वाला फूड खा रहे हैं तो आप इसे लो जीआई फूड के साथ खा सकते हैं। इससे ब्‍लड ग्‍लूकोज़ लेवल संतुलित रहता है।

कई पोषक खाद्यों में कम पोषक खाद्यों की तुलना में जीआई ज्‍यादा होता है। जैसे कि ओटमील में चॉकलेट से ज्‍यादा जीआई होता है।

जीआई और डायबिटीज़

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कम जीआई वाले फूड डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए फायदेमंद होते हैं। उच्‍च कार्बोहाइड्रेट युक्‍त खाद्यों के नियंत्रित सेवन पर भी ये बात लागू होती है।

लो जीआई डाइट वाले फूड शरीर में धीमी गति से एनर्जी में परिवर्तित होते हैं। लो जीआई डाइट डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए बेहतर होती है क्‍योंकि ये हाई जीआई वाले फूड्स की तुलना में ब्‍लड ग्‍लूकोज़ लेवल को प्रभावित तरीके से नियंत्रित और संतुलित कर पाते हैं।

हाई जीआई वाले फूड जल्‍दी टूट जाते हैं और इससे तेजी से ब्‍लड ग्‍लूकोज़ का स्‍तर बढ़ता है। डायबिटीज़ के मरीज़ों को हाई जीआई वाले फूड्स का सेवन नहीं करना चाहिए।

जीआई एक पैमौन का उपायोग कर उन फूड्स के बारे में बताता है जिसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्‍यादा होती है। जितना ज्‍यादा जीआई होगा रक्‍त शर्करा में उतनी ही तेज वृद्धि होगी।

कम जीआई वाले फलों में स्‍ट्रॉबेरी, काला जामुन, सेब, अमरूद, आडू और नारंगी आदि शामिल है। मधुमेह के मरीज़ों को इन फलों का सेवन करना चाहिए क्‍यों‍कि इससे उनके शरीर में ब्‍लड ग्‍लूकोज़ का लेवल नहीं बढ़ता है।

जो कार्बोहाइड्रेट खाने के बाद तेजी से टूटते हैं और ब्‍लड में ग्‍लूकोज़ को तेजी से रिलीज़ करते हैं उनमें हाई जीआई होता है। वहीं जो कार्बोहाइड्रेट धीरे से टूटते हैं उनमें जीआई कम होता है।

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