जानिए क्‍या होना चाहिए नॉर्मल ब्‍लड शुगर का लेवल

blood sugar

डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए ब्‍लड ग्‍लूकोज़ लेवल को जानना बहुत जरूरी होता है। ब्‍लड शुगर के सामान्‍य स्‍तर के बारे में जानकारी रखकर आप बेहतर तरीके से मधुमेह को नियंत्रित कर सकते हैं। अगर आप टेस्‍ट स्ट्रिप से ब्‍लड ग्‍लूकोज़ लेवल को चैक कर रहे हैं तो आपको पता होना चाहिए कि ब्‍लड ग्‍लूकोज़ लेवल का क्‍या मतलब होता है।

टाइप 1 डायबिटीज़ से ग्रस्‍त बच्‍चों और वयस्‍कों में टाइप 2 डायबिटीज़ की तुलना में ब्‍लड शुगर का सामान्‍य स्‍तर बहुत अलग होता है। हर व्‍यक्‍ति में ब्‍लड ग्‍लूकोज़ लेवल अलग होता है, ये आपकी बॉडी टाइप पर भी निर्भर करता है।

सामान्‍य तौर पर किसी भी व्‍यक्‍ति में ब्‍लड शुगर को मापने का अलग-अलग तरीका होता है। आमतौर पर खाना खाने के 6 से 8 घंटे के बाद ब्‍लड ग्‍लूकोज़ के लेवल की जांच की जाती है और सुबह नाश्‍ते से पहले। ब्‍लड शुगर का सामान्‍य स्‍तर 70 से 100 मिलीग्राम प्रति डेसिलीटर होता है। अगर आप डायबिटीज़ के मरीज़ नहीं हैं तो आप खाना खाने के बाद अपना ब्‍लड शुगर लेवल चैक कर सकते हैं लेकिन ये 135 से 140 मिलीग्राम प्रति डेसिलिटर से ज्‍यादा नहीं होना चाहिए।

नेशनल इंस्‍टीट्यूट फॉर क्‍लीनिकल एक्‍सलेंस के मानकों के अनुसार स्‍वस्‍थ लोगों जिन्‍हें कोई गंभीर बीमारी ना हो उनमें सामान्‍य ब्‍लड शुगर का स्‍तर 4 एमएम होना चाहिए। खाना खाने के बाद ब्‍लड ग्‍लूकोज़ लेवल 7.8 एमएमओएल तक बढ़ सकता है।

डायबिटीज़ के मरीज़ों में ब्‍लड ग्‍लूकोज़ का स्‍तर कुछ ऐसे होना चाहिए :

  • खाना खाने से पहले : टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ों में 4 से 7 एमएमओएल
  • खाना खाने के बाद : टाइप 1 डायबिटीज़ में 9 एमएमओएल से कम और टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ों में 8.5 एमएमओएल
  • ब्‍लड शुगर लेवल से डायबिटीज़ का पता लग सकता है

आमतौर पर डायबिटीज़ का पता लगाने के लिए डाक्‍टर दो तरह के टेस्‍ट करते हैं जो इस प्रकार हैं :

इंपेयर्ड फासिटंग ग्‍लाइसेमिया टेस्‍ट : इस टेस्‍ट को व्रत के आठ घंटे के बाद किया जाता है। इसमें ब्‍लड शुगर लेवल कुछ इस तरह होता है :

  • सामान्‍य स्‍तर में 4.0 से 5.9 एमएमओएल होता है।
  • 6.9 एमएमओएल से ज्‍यादा है तो वह व्‍यक्‍ति प्रीडायबिटीज़ का शिकार है।
  • अगर लेवल 6.9 एमएमओएल से ज्‍यादा है तो आपको डायबिटीज़ की बीमारी है।

इंपेयर्ड ग्‍लूकोज़ टॉलरेंस टेस्‍ट : इस टेस्‍ट से पहले मरीज़ को कुछ मात्रा में ग्‍लूकोज़ लेने के लिए कहा जाता है और इसके 2 घंटे के बाद डॉक्‍टर आपका ब्‍लड शुगर लेवल चैक करते हैं। ये इस प्रकार है :

  • सामान्‍य व्‍यक्‍ति में 7.8 एमएमओएल
  • 7.9 से 11.1 एमएमओएल से ज्‍यादा है तो वह व्‍यक्‍ति प्रीडायबिटीज़ का शिकार है।
  • अगर लेवल 11.1 एमएमओएल से ज्‍यादा है तो आपको डायबिटीज़ की बीमारी है।

डायबिटीज़ के मरीज़ में लो ब्‍लड शुगर को हाइपरग्‍लाइसेमिया और हाई ब्‍लड शुगर को हाइपोग्‍लाइसेमिया कहा जाता है। अगर ब्‍लड शुगर 60 या 65 मिलीग्राम प्रति डेसिलिटर गिर जाए तो इसमें व्‍यक्‍ति की भूख बढ़ जाती है। वहीं अगर 50 एमजी/डीएल से कम हो तो ऐसे में व्‍यक्‍ति अपनी सुधबुध खो सकता है।

अगर ब्‍लड ग्‍लूकोज़ लेवल 180 से 200 एमएम/डीएल से ज्‍यादा है तो उसे सेहत संबंधित परेशानी हो सकती है जैसे कि ह्रदय रोग, किडनी रोग, आंखों से कम दिखाई देना, नर्व डैमेज आदि। ये रक्‍त कोशिकाओं को भी क्षतिग्रस्‍त कर सकता है जोकि प्रमुख अंगों को रक्‍त प्रवाह करने का काम करती हैं।

ब्‍लड शुगर नॉर्मल रखने के टिप्‍स

  • नियमित व्‍यायाम से वजन को कम और इंसुलिन की संवेदनशीलता को बढ़ाया जा सकता है। इंसुलिन की संवेदनशीलता बढ़ने से कोशिकाएं बेहतर तरीके से रक्‍त वाहिकाओं में शुगर का स्‍त्राव कर पाती हैं। व्‍यायाम से मांसपेशियां ऊर्जा में ब्‍लड शुगर का इस्‍तेमाल कर पाती हैं। वेट लिफ्टिंग, ब्रिस्‍क वॉकिंग, दौड़ना, बाइकिंग, डांसिंग, हाइकिंग और तैराकी आदि कर सकते हैं।
  • शरीर कार्बोहाइड्रेट को शुगर में बदल देता है और फिर इंसुलिन शुगर को कोशिकाओं में भेजता है। अधिक मात्रा में कार्बोहाइड्रेट का सेवन करने से इंसुलिन के कार्य में बाधा आ सकती है और इससे ब्‍लड ग्‍लूकोज़ का स्‍तर बढ़ सकता है। अपने खाने में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा का ध्‍यान रखें। लो कार्ब डाइट से ब्‍लड शुगर के स्‍तर को कम रखा जा सकता है।
  • पर्याप्‍त पानी पीने से हर बीमारी से छुटकारा पाया जा सकता है। पर्याप्‍त मात्रा में पानी पीने से ब्‍लड शुगर का स्‍तर सामान्‍य रहता है। अधिक मात्रा में पानी पीने से किडनी से यूरिन के रास्‍ते अधिक ब्‍लड शुगर शरीर से बाहर निकल जाता है। रोज़ पानी पीने से रक्‍त री-हाइड्रेट रहता है और ब्‍लड शुगर का स्‍तर कम हो जाता है जिससे डायबिटीज़ का खतरा नहीं रहता।

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