वेगन डाइट से घट सकता है टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा

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अधिक वजन या मोटापे को टाइप 2 डायबिटीज़ का प्रमुख कारण माना जाता है। हाल ही में हुई एक रिसर्च में एक ऐसी रणनीति का सुझाव दिया गया है जो अधिक वजन वाले लोगों को इसे कंट्रोल करने में मदद करती है और इसमें मांस और डेयरी छोड़ना भी शामिल है।

शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन ओवरवेट लोगों ने 16 सप्‍ताह तक वेगन डाइट ली उनमें कंट्रोल ग्रुप की तुलना में इंसुलिन सेंसिटिविटी के साथ-साथ बीटा कोशिकाओं की क्रिया में भी सुधार आया।

बीटा सेल्‍स पैंक्रियाज़ में होता है और ये इंसुलिन का उत्‍पादन और उसे रिलीज़ करने का काम करते हैं। वेगन डाइट से व्रत रखने और खाने के दौरान ब्‍लड शुगर लेवल में भी सुधार आता है।

वॉशिंगटन की फिजिशियन कमेटी के डॉ. हाना केहलेओवा का कहना है कि इस अध्‍ययन के परिणाम डायबिटीज़ से बचाव में मददगार साबित होंगें। डॉ. केहलेओवा और उनके सहकर्मियों द्वारा की गई इस स्‍टडी के परिणाम जर्नल न्‍यूट्रिएंट्स में प्रकाशित हुआ है।

जब लंबे समय तक शरीर प्रभावित तरीके से इंसुलिन के प्रति प्रतिक्रिया नहीं दे पाता है तो ऐसे में टाइप 2 डायबिटीज़ बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है। इस स्थिति इंसुलिन रेसिस्‍टेंस भी कहा जाता है। इंसुलिन एक ऐसा हार्मोन है जोकि ब्‍लड शुगर के स्‍तर को नियंत्रित करता है।

परिणामस्‍वरूप ब्‍लड शुगर का स्‍तर बहुत ज्‍यादा हो जाता है। इससे कोई गंभीर समस्‍या जैसे कार्डियोवास्‍कुलर रोग, किडनी रोग, डायबिटीक आई डिजीज़ और नर्व डैमेज हो सकता है।

यूएस में 30 मिलियन से ज्‍यादा लोग डायबिटीज़ के मरीज़ हैं और इनमें से 90 से 95 प्रतिशत मामले टाइप 2 डायबिटीज़ के ही हैं।

वेगन डाइट के प्रभाव पर स्‍टडी

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ओवरवेट लोगों में टाइप 2 डायबिटीज़ की संभावना बहुत ज्‍यादा बढ़ जाती है। यहां तक कि जिन्‍हें टाइप 2 डायबिटीज़ था उनमें 80 प्रतिशत लोग ओवरवेट और मोटापे का शिकार थे।

लाइफस्‍टाइल में बदलाव जैसे कि संतुलित आहार और शारीरिक व्‍यायाम से टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा कम हो सकता है। डॉ. केहलोओवा और उनकी टीम ने इस स्‍टडी के माध्‍यम से बताया है कि वेगन डाइट से ओवरवेट लोगों को टाइप 2 मधुमेह की बीमारी से बचाया जा सकता है।

इस परिणाम तक पहुंचने के लिए शोधकर्ताओं ने 25 से 75 साल की उम्र के 75 पुरुषों और महिलाओं पर रिसर्च की। सभी प्रतिभागियों का बॉडी मास इंडेक्‍स यानि बीएमआई 28 से 40 के बीच था और ये सभी ओवरवेट या मोटापे का शिकार थे लेकिन इनकी मधुमेह की कोई हिस्‍ट्री नहीं रही थी।

16 सप्‍ताह तक इन सभी लोगों को 1:1 के अनुपात में दो अलग समूहों में बांटा गया था। एक ग्रुप को लो फैट वेगन डाइट दी गई जिसमें फल-सब्जियां, दालें और साबुत अनाज शामिल थे। इस डाइट में कैलोरी को लेकर कोई प्रतिबंध नहीं था। वहीं दूसरे ग्रुप के प्रतिभागियों को अपनी डाइट में कोई बदलाव ना करने के लिए कहा गया है।

टीम ने इस बात को नोट किया कि किसी भी ग्रुप की फिजिकल एक्‍टिविटी में कोई बदलाव नहीं किया गया और ना ही उनकी दवाएं बदली गई।

स्‍टडी की बेसलाइन पर 16 सप्‍ताह तक बीटा कोशिकाओं की क्रिया, इंसुलिन सेंसिटिविटी, ब्‍लड ग्‍लूकोज़ लेवल और बीएमआई पर ध्‍यान दिया गया।

दवा की तरह काम करता है खाना

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इस स्‍टडी में खुलासा हुआ है‍ कि जिन प्रतिभागियों ने लो फैट वेगन डाइट ली उनके बीएमआई में कंट्रोल ग्रुप की तुलना में कमी आई। वहीं वेगन डाइट लेने वाले ग्रुप में खाने के बाद इंसुलिन स्राव में वृद्धि, हुई साथ ही इंसुलिन संवेदनशीलता में भी सुधार पाया गया।

वेगन डाइट लेने वाले प्रतिभागियों में खाने और व्रत के दौरान ब्‍लड शुगर के स्‍तर में भी कमी दर्ज की गई।

इसके परिणामस्‍वरूप टीम ने बताया कि वेगन डाइट लेने से प्रभावी तरीके से टाइप 2 डायबिटीज़ को होने से रोका जा सकता है।

अगर आने वाली पीढ़ी ने अपने लाइफस्‍टाइल में कोई बदलाव नहीं किया तो उनकी आयु अपने माता-पिता की तुलना में कम हो जाएगी। साथ ही इस स्‍डटी में यह भी बताया गया कि खाना दवा की तरह काम करता है और प्‍लांट बेस्‍ड डाइट लेने आप लंबे समय तक डायबिटीज़ से बच सकते हैं।

वेगन डाइट में इन चीज़ों को करें शामिल

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  • वेगन डाइट में होल व्‍हीट ब्रेड, होलसम फूड्स, अनाज और सलाद शामिल होता है।
  • वेगन डाइट में किसी भी तरह का डेयरी प्रॉडक्‍ट शामिल नहीं होता है।
  • इसके अलावा शुगर फ्री उत्‍पाद भी लिए जा सकते हैं।

मार्केट में कई तरह की वेगन डाइट रेसिपी उपलब्‍ध हैं। वेगन डाइट लेने से शरीर में ना केवल इंसुलिन का उत्‍पादन नियं‍त्रित और संतुलित रहता है बल्कि इससे वजन भी कम रहता है।

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