नाइट शिफ्ट में काम करने वालों पर मंडरा रहा है टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा

shift 1

शोधकर्ताओं ने चेताया है कि जो लोग नाइट शिफ्ट में काम करते हैं उनमें टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा ज्‍यादा रहता है। इनमें ह्रदय रोगों का खतरा भी बना रहता है।

दुनियाभर में अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले लोग अलग शिफ्ट्स में काम करते हैं और इसका असर उनकी सेहत पर पड़ता है। इससे पहले भी नाइट शिफ्ट में काम करने पर कई बीमारियों के खतरे के बारे में बताया जा चुका है।

शिफ्ट में काम करने, खासतौर पर नाइट शिफ्ट में काम करने वाले लोगों का शारीरिक संतुलन बिगड़ जाता है और इससे स्‍वास्‍थ्‍य संबंधित कई समस्‍याएं पैदा होने लगती हैं। जिन लोगों को नाइट शिफ्ट में काम करना पसंद है उन्‍हें ये बात समझनी चाहिए कि इससे उनकी बॉडी क्‍लॉक और लाइफस्‍टाइल बिगड़ता है।

क्‍या है टाइप 2 डायबिटीज़

shift 2

टाइप 2 डायबिटीज़ ऐसी घातक बीमारी है जिसमें शरीर में ब्‍लड शुगर (ग्‍लूकोज़) बनने की प्रक्रिया बाधित होने लगती है। दुनियाभर में टाइप 2 डायबिटीज़ के करोड़ों मरीज़ हैं। इसका मतलब है कि इन लोगों के शरीर में ब्‍लड शुगर के स्‍तर को संतुलित रखने के लिए पर्याप्‍त इंसुलिन का उत्‍पादन नहीं हो पा रहा है। टाइप 2 मधुमेह के रोगियों में इंसुलिन तो बनता है लेकिन वो शरीर के लिए पर्याप्‍त नहीं होता है। इंसुलिन की मदद से शरीर की कोशिकाओं तक ग्‍लूकोज़ पहुंच पाता है और जब पर्याप्‍त मात्रा में इंसुलिन नहीं बन पाता तो ग्‍लूकोज़ की आपूर्ति ना हो पाने पर शरीर में ऊर्जा की कमी हो जाती है। इसे इंसुलिन प्रतिरोध कहते हैं।

क्‍या कहती है स्‍टडी

shift 3

स्‍टडी में पाया गया कि जो लोग अनियमित और बदलने वाली शिफ्ट्स या नाइट शिफ्ट में काम करते हैं उनमें 44 प्रतिशत टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा बढ़ जाता है।

इस स्‍टडी में नाइट और दिन की शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों पर अध्‍ययन किया गया। इसमें पाया गया कि दिन की शिफ्ट को छोड़कर बाकी सभी शिफ्टों में काम करने वाले लोगों में टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा ज्‍यादा था।

इस अध्‍ययन में नाइट शिफ्ट और टाइप 2 डायबिटीज़ के बीच संबंध पाया गया। जितना ज्‍यादा आप अलग-अलग और अनियमित शिफ्टो में काम करेंगें उतना ही ज्‍यादा आप अस्‍वस्‍थ होते जाएंगें। इसका मतलब है कि अगर आपकी शिफ्ट बदलती रहती है तो आपके ऊपर कई बीमारियां मंडरा रही हैं।

इसमें रोज़ नाइट शिफ्ट करना ज्‍यादा खतरनाक बताया गया है। नाइट शिफ्ट में काम करने से हमारी बॉडी क्‍लॉक बिगड़ जाती है और कई बीमारियां घर करने लगती हैं।

जर्नल डायबिटीज़ केयर में प्रकाशित हुई स्‍टडी में टीम ने 270,000 से ज्‍यादा लोगों पर रिसर्च की जिसमें 70,000 प्रतिभागियों ने अपनी लाइफटाइम एंप्‍लॉयमेंट की पूरी जानकारी दी और 44,000 से ज्‍यादा उप-समूह के आनुवांशिक डाटा उपलब्ध थे।

इनमें से 6,000 से भी ज्‍यादा लोगों को टाइप 2 डायबिटीज़ थी। टाइप 2 मधुमेह के साथ जुड़े 100 से अधिक आनुवांशिक रूपों की जानकारी का उपयोग कर रिसर्च टीम ने एक आनुवांशिक जोखिम स्कोर विकसित किया है, जो कि प्रत्येक प्रतिभागी के लिए एक मूल्य निर्दिष्ट करते थे।

परिणाम बताते हैं कि जिन लोगों में उच्च आनुवांशिक जोखिम स्कोर था उनमें टाइप 2 डायबिटीज की संभावना कम आनुवांशिक जोखिम स्कोर वाले व्यक्तियों की तुलना में चार गुना ज्‍यादा थी।

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के अनुसार सन् 1980 से अब तक डायबिटीज़ के मरीज़ों की संख्‍या दोगुनी हो चुकी है। तब मधुमेह के 4.7 प्रतिशत मरीज़ थे जोकि अब बढ़कर 8.5 प्रतिशत हो गया है। ये संख्‍या युवाओं पर आधारित है। इनमें से अधिकतर लोग टाइप 2 डायबिटीज़ के शिकार हैं।

सेहत और नाइट शिफ्ट को लेकर हुए पहले अध्‍ययनों में ओबेसिटी, डीएनए डैमेज, लिवर को नुकसान, नींद में कमी और कैंसर आदि के बारे में बताया गया है।

क्‍या है समाधान

अगर आप उचित आहार लेते हैं और रोज़ व्‍यायाम करते हैं तो आपमें मधुमेह के साथ-साथ अन्‍य कई तरह की बीमारियों का खतरा कम हो सकता है। आपको अपनी डाइट में सुपरफूड्स और फाइबर युक्‍त आहार को भी शामिल करना चाहिए। इससे आपको बीमारियों से लड़ने में मदद मिलेगी। खराब जीवनशैली के साथ-साथ अधिक वजन वाले लोगों में भी इस बीमारी का खतरा रहता है। व्‍यायाम और खानपान पर ध्‍यान रखकर इस बीमारी को होने से रोका जा सकता है।

सबसे जरूरी बात, अगर संभव हो तो नाइट की जगह दिन की शिफ्ट में काम करने की कोशिश करें।

Read source

Image source

Image source 2

Image source 3

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *