महिलाओं में डायबिटीज़ का कारण बन रहा है पीसीओएस

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ऑल इंडिया इंस्‍टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस यानि एम्‍स द्वारा की गई एक स्‍टडी में खुलासा हुआ है कि पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यानि पीसीओएस के कारण मधुमेह जैसी घातक बीमारी होने का खतरा रहता है। पीसीओएस एक ऐसी बीमारी है जिसमें महिलाओं के शरीर में हार्मोंस असंतुलित हो जाते हैं। ये बीमारी महिलाओं में ही होती है।

एम्‍स के डॉक्‍टर्स ने ओपीडी सेशन से जुड़े कुछ मरीज़ों पर आधारिक सर्वे और अध्‍ययन के आधार पर यह बताया कि इंसुलिन रेसिस्‍टेंस पीसीओएस का एक अभिन्‍न अंग है। सामान्‍य लोगों की तुलना में पीसीओएस के मरीज़ों में डायबिटीज़ का खतरा बहुत ज्‍यादा रहता है। इसके अलावा कुछ दिनों पहले हुए एक अध्‍ययन में यह भी खुलासा हुआ है कि हाइपरटेंशन की वजह से भी लोग मधुमेह का शिकार हो जाते हैं।

क्‍या है पीसीओएस

पीसीओएस एक अंत:स्रावी विकार है और इस बीमारी के होने पर महिलाओं में अंडाशय ठीक से काम नहीं करता है। अब यह सिर्फ प्रजनन संबंधी विकार नहीं रह गया है बल्कि इसका संबंध शरीर में मौजूद अंत:स्रावी ग्रंथि‍यों और पाचन तंत्र से भी है। इस विकार में महिलाओं के शरीर में एस्‍ट्रोजन और प्रोजेस्‍ट्रॉन नामक सेक्‍स हार्मोन के बीच संतुलन बिगड़ जाता है। ये बीमारी 15 से 30 उम्र की महिलाओं के बीच ज्‍यादा होती है।

इस स्‍टडी में इंसुलिन रेसिस्‍टेंस को डायबिटीज़ का कारण बताया गया है आर इसे आप मधुमेह के सबसे शुरुआती कारण की श्रेणी में भी ले सकते हैं।

इंसुलिन रेसिस्‍टेंस एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर इंसुलिन तो बनाता है लेकिन उसे प्रभावित तरीके से इस्‍तेमाल नहीं कर पाता है। इंसुलिन रेसिस्‍टेंस होने पर रक्‍त कोशिकाओं में ग्‍लूकोज़ अवशोषित होने की जगह रक्‍त में ही जमने लगता है और इस वजह से आगे चलकर टाइप 2 डायबिटीज़ और प्री डायबिटीज़ होता है। प्रजनन उम्र की महिलाओं में सबसे आम अंतःस्रावी विकार पीसीओएस है।

पीसीओएस के लक्षण

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  • अनियमित माहवारी
  • वजन अचानक से बढ़ना
  • अनियमित ओवुलेशन
  • बालों का झड़ना
  • तैलीय त्‍वचा या या मुँहासों की समस्‍या

पीसीओएस के लक्षण सभी महिलाओं में अलग-अलग होते हैं और इसका पता भी आसानी से नहीं लग पाता है। इंसुलिन रेसिस्‍टेंस को डायबिटीज़ के प्रमुख कारण के रूप में पहचाना गया है। अगर किसी को पीसीओएस की बीमारी है तो उन्‍हें मधुमेह से बचने के लिए पहले से ही सतर्क कर दिया जाता है।

एक रिपोर्ट में सामने आया है कि दुनियाभर में पीसीओएस के मामलों में 10 प्रतिशत भारत से है। पीसीओएस से संबंधित मौजूदा डाटा के अनुसार यूएसए में 4-10 प्रतिशत महिलाएं पीसीओएस से पीडित हैं और यूरोपियन देशों में 2 प्रतिशत मरीज़ हैं। इंटरनेशनल डायबिटीज़ फेडरेशन 2014 की हाल ही में प्रस्‍तुत की गई एक रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में डायबिटीज़ की बीमारी बड़ी तेजी से बढ़ रही है और 2035 तक दुनियाभर में मधुमेह से 387 मिलियन ग्रस्‍त होंगें।

इसके अलावा पीसीओएस की वजह आगे चलकर और भी कई तरह की बीमारियां होती हैं जैसे टाइप 2 डायबिटीज़, हाइपरटेंशन, ह्रदय रोग, मेटाबॉलिक सिंड्रोम, स्‍लीप एप्‍निया आदि। हालांकि 50 प्रतिशत महिलाओं को अपने अंदर इस बीमारी के बढ़ने या होने का पता ही नहीं चल पाता है।

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महिलाओं में होने वाली ये बीमारी बहुत भयंकर होती है। इसमें शरीर पर कई तरह के लक्षण दिखाई देते हैं जैसे कि अनियमित माहवारी होना और पीरियड्स के दिनों में बहुत दर्द या थकान महसूस होना। पीसीओएस का सबसे खतरनाक प्रभाव यही है कि इसके कारण महिलाओं में बांझपन की समस्‍या भी हो सकती है। जी हां, इस बीमारी के कारण महिलाओं के मां बनने की क्षमता कम होने लगती है और अगर समय पर इसक ईलाज ना करवाया जाए तो महिलाएं बांझ बन सकती हैं।

क्‍या खाएं

पीसीओएस की बीमारी में महिलाओं को कम ग्‍लाइसेमिक इंडेक्‍स वाली चीज़ों का सेवन करना चाहिए। कम जीआई वाले आहार का सेवन करने से पीसीओएस के लक्षणों में कमी आती है। साबुत अनाज, फल–सब्जियों और खजूर आदि में लो जीआई होता है।

फाइबरयुक्‍त आहार से भी डायबिटीज़ का खतरा कम हो जाता है। फाइबर रक्‍त शर्करा के स्‍तर को कम करता है और नियंत्रित रूप में बढ़ाता है।

पीसीओएस के बारे मं महिलाओं में जागरूकता ना के बराबर है और इस वजह से इसका ईलाज नहीं हो पाता है। समय पर दवा और ईलाज ना मिलने की स्थिति में ये बीमारी बढ़ती रहती है और इसका दुष्‍प्रभाव महिलाओं के शरीर पर बढ़ता रहता है। इसके शुरुआती लक्षणों को महिलाएं नज़रअंदाज़ कर देती हैं और यही इस बीमारी के निदान में सबसे बड़ी समस्‍या है।

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