मधुमेह की बीमारी में बच्‍चों को इन चीज़ों से रखें दूर

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आजकल दुनियाभर में डायबिटीज़ की बीमारी बहुत तेजी से बढ़ रही है। अगर आपको इसके बारे में पूरी जानकारी होगी तो शायद आप इस सालेंट किलर कही जाने वाली बीमारी से बच सकते हैं। आपको डायबिटीज़ के लक्षण, ईलाज और ट्रीटमेंट आदि के बारे में पता होना चाहिए। बड़े तो डायबिटीज़ के बारे में सब कुछ पता कर ही लेते हैं लेकिन बच्‍चों का क्‍या ?

बच्‍चों में भी मधुमेह की बीमारी होती है और उन्‍हें एवं उनके माता-पिता को इसके बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए।

बच्‍चे कभी भी कुछ भी खा लेते हैं और उन्‍हें मधुमेह के बारे में कुछ भी पता नहीं होता है इसलिए ये माता-पिता की जिम्‍मेदारी है कि वो अपने बच्‍चों की खानपान की आदतों का ध्‍यान रखें और इस बात पर नज़र रखें कि वो क्‍या खा रहे हैं। अगर आपके बच्‍चे को डायबिटीज़ है तो आपको अपने बच्‍चों से उन चीज़ों को दूर रखना चाहिए जिनसे रक्‍त में शुगर लेवल बढ़ जाता है।

आज हम आपको कुछ ही फूड्स के बारे में बता रहे हैं जिनसे बच्‍चों को दूर रखना चाहिए।

सेब का रस

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आपको बड़ी आसानी से मार्केट में सेब का रस मिल जाएगा। बाज़ार में ऐसे कई ब्रांड्स मौजूद हैं जो ताजे फलों से बने होते हैं और इनमे लो शुगर होने का दावा किया जाता है लेकिन असल में ऐसा होता नहीं है। दरअसल, सभी फलों थोड़ा-बहुत तो शुगर होता है और इससे वजन बढ़ सकता है और वजन बढ़ने से टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा बढ़ जाता है। इसकी जगह आप घर पर ही ताजा फलों का रस बना सकते हैं।

सफेद चावल

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सफेद चावल खाने से टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा दोगुना हो जाता है। सफेद चावलों का नकारात्‍मक प्रभाव ब्‍लड शुगर के स्‍तर पर पड़ता है और इनमें मौजूद स्‍टार्च बच्‍चों में ब्‍लड शुगर के स्‍तर को बढ़ा सकता है। सफेद चावलों में मौजूद कार्बोहाइड्रेट की उच्‍च मात्रा भी शुगर लेवल को बढ़ा देती है। अपने बच्‍चों को इसकी जगह ब्राउन राइस खिलाएं।

ब्‍लेंड कॉफी

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आजकल बच्‍चों को कॉफी का बहुत शौक है। हालांकि, माता-पिता होने के नाते आपको कॉफी शॉप्‍स में उपलब्‍ध ब्‍लेंडेड कॉफी के सेवन पर ध्‍यान देना चाहिए। स्‍वाद के लिए कॉफी में सिरप, व्‍हिप्‍ड क्रीम, शुगर, आर्टिफिशियल स्‍वीटनर और कई अन्‍य चीज़ें डाली जाती हैं। इन चीज़ों से बच्‍चों का वजन बढ़ सकता है और फिर इससे अपने आप ही ब्‍लड शुगर का स्‍तर भी बढ़ जाता है।

सोडा और कोल्‍ड ड्रिंक्‍स

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सोडा और स्‍वीटेंड ब्रेवरेज़ज भी बच्‍चों की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। बच्‍चों को बाज़ार में मिलने वाले कोल्‍ड ड्रिंक्‍स और कोला आदि बहुत पसंद होते हैं लेकिन उन्‍हें इसके नुकसान के बारे में पता नहीं होता है। इनसे ना केवल वजन बढ़ता है बल्कि रक्‍त में शुगर का स्‍तर भी बढ़ जाता है और फिर अपने आप ही ये टाइप 2 डायबिटीज़ का कारण बनता है।

फास्‍टफूड

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हम सभी जानते हैं कि फास्‍टफूड का हमारे शरीर पर कितना बुरा असर पड़ता है। फ्रेंच फ्राइज़ और बर्गर आदि से वजन बढ़ जाता है। ओवरवेट होने पर रक्‍त में शुगर का स्‍तर बढ़ सकता है। बच्‍चों में मधुमेह का सबसे बड़ा कारण फास्‍ट फूड पर अधिक निर्भरता और व्‍यायाम से बढ़ती दूरी है। डॉक्‍टरों का कहना है कि पूरा दिन में बच्‍चे कुछ ना कुछ खाते रहते हैं और इस वजह से उनके शरीर पर फैट जम जाता है और ऐसे में मधुमेह रोग होने की संभावना प्रबल हो जाती है। बच्‍चों की डाइट में सुपरफूड जैसे दालचीनी आदि को शामिल करना चाहिए।

बच्‍चों में कुछ तरह के वायरल इंफेक्‍शन की वजह से भी टाइप 1 डायबिटीज़ होने का खतरा रहता है क्‍योंकि ये इंसुलिन का उत्‍पादन करने वाली कोशिकाओं को नष्‍ट कर देता है। अगर आप ज्‍यादा मात्रा में कार्बोहाइड्रेट का सेवन करते हैं तो आपको डायबिटीज़ की बीमारी हो सकती है। अगर माता-पिता में से किसी एक को या दोनों हो ही डायबिटीज़ की बीमारी होती है तो उनके बच्‍चे में भी इसका खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

देखा जाए तो पिछले कुछ सालों में बच्‍चों में होने वाले डायबिटीज़ के मामलों में 15 प्रतिशत से ज्‍यादा की बढ़ोत्तरी हुई है। चिंता का विषय यह है कि टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज़ दोनों ही तरह के मधुमेह के मामलों में बच्‍चों में बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है।

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