बिना दवा के इस तरह ठीक हो सकती है डायबिटीज़

 

टाइप 1 डायबिटीज़ की बीमारी में ब्‍लड ग्‍लूकोज़ के स्‍तर को सामान्‍य रखने के लिए रोज़ाना इंसुलिन इंजेक्‍शन लेना पड़ता है। डायबिटीज़ की बीमारी में शरीर में इंसुलिन या तो बिलकुल नहीं बन पाता है या फिर अपर्याप्‍त बनता है। इंसुलिन एक महत्‍वपूर्ण हार्मोन है तोकि शरीर को भोजन को एनर्जी में बदलने में मदद करता है। बिना इंसुलिन के इंसान की मृत्‍यु निश्‍चित है।

अब बात करते हैं कि क्‍या टाइप 2 डायबिटीज़ की बीमारी को बिना दवाओं के भी नियंत्रित किया जा सकता है ?

जी हां, आप ऐसा कर सकते हैं। कई मामलों में ब्‍लड ग्‍लूकोज़ के लेवल को दवाओं के बिना भी सामान्‍य स्‍तर रखा गया है। अगर आप वजन कम कर लें और रोज़ान शारीरिक व्‍यायाम करें और संतुलित आहार लें तो आप मधुमेह की बीमारी को नियंत्रित कर सकते हैं।

हालांकि कई लोगों वजन को नियंत्रित करने, व्‍यायाम और संतुलित आहार लेने के बाद भी मधुमेह पर कंट्रोल नहीं मिल सका, इतना सब कुछ करने के बाद भी उनका ब्‍लड ग्‍लूकोज़ स्‍तर सामान्‍य नहीं हो पाया। ये सामान्‍य बात है। ऐसा इसलिए भी हो सकता है क्‍योंकि कुछ लोगों के शरीर में इंसुलिन का उत्‍पादन करने वाली कोशिकाएं ज्‍यादा से ज्‍यादा इंसुलिन बनाते-बनाते थक जाती हैं, ऐसा इसलिए होता है क्‍योंकि ये कोशिकाएं इंसुलिन के प्रभाव से संवेदनशील हो जाती हैं।

वियतनाम में हुई एक स्‍टडी में मधुमेह की नई ट्रीटमेंट कोरा के बारे में बताया गया है। ये मधुमेह की बीमारी पर प्रभावकारी साबित हुई है।

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जब शरीर में इंसुलिन बनना रूक जाता है या बंद हो जाता है तो डायबिटीज़ की बीमारी घेर लेती है। इस बीमारी का प्रमुख कारण हमारी लाइफस्‍टाइल और जीन हैं। हर इंसान में मधुमेह का रूप अलग होता है। किसी में ये बहुत ज्‍यादा गंभीर होती है तो कहीं सामान्‍य स्‍तर पर रहती है। टाइप 1 डायबिटीज़ में इंसुलिन लेना बहुत जरूरी होता है लेकिन टाइप 2 डायबिटीज़ को आप बिना दवाओं के भी विभिन्‍न तरीकों से ठीक कर सकते हैं।

दवाओं के बिना डायबिटीज़ को कंट्रोल करने के कई तरीके हैं। मधुमेह से छुटकारा पाने के लिए आप भी इन प्राकृतिक तरीकों का इस्‍तेमाल कर सकते हैं।

व्‍यायाम

आधुनिक जीवनशैली की देन है टाइप 2 डायबिटीज़। मांसपेशियों की कसरत करने या उनसे ज्‍यादा मेहनत करवाने से उनकी इंसुलिन प्रयोग करने की क्षमता बेहतर हो पाती है और वो ग्‍लूकोज़ बना पाती हैं। इससे इंसुलिन उत्‍पादन वाली कोशिकाओं पर कम दबाव पड़ता है। फिट रहने के लिए नियमित व्‍यायाम जरूरी है।

डाइट से शुगर को करें आउट

चीनीयुक्‍त खाद्य और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट से आप मधुमेह के शिकंजे में आ सकते हैं। आपका शरीर बहुत जल्‍दी इन खाद्यों को ग्‍लूकोज़ में बदल देता है जोकि बाद में रक्‍त में घुल जाता है। इस वजह से तुरंत ब्‍लड शुगर का स्‍तर बढ़ जाता है। अपने आहार से परिष्‍कृत कार्बोहाइड्रेट और शुगर युक्‍त खाद्यों को हटाएं और उसमें फाइबरयुक्‍त चीज़ों को शामिल करें।

वजन करें कम

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डायबिटीज़ से बचने के लिए शरीर पर जमी अतिरिक्‍त चर्बी को घटाने की जरूरत है। वजन घटाने से रक्‍त शर्करा के स्‍तर को घटाने में मदद मिलती है। डाय‍टीशियन या फिटनेस ट्रेनर की मदद से आप कम समय में अपना मोटापा कम कर सकते हैं। अगर आप वजन कम कर रहे हैं या डायबिटीज़ को कंट्रोल रखने की कोशिश कर रहे हैं तो ऐसे में आपको फाइबर की बहुत जरूरत होती है।

अन्‍य उपाय

धूम्रपान छोड़कर मधुमेह के खतरे को तो कम किया जा ही सकता है साथ ही इससे आप स्‍वस्‍थ भी रहते हैं इसलिए धूम्रपान किसी भी तरह से सेहत के लिए फायदेमंद नहीं है। इसके अलावा बहुत ज्‍यादा तनाव लेने से ग्‍लूकोज़ का स्‍तर बहुत ज्‍यादा बढ़ जाता है। 15 मिनट तक रिलैक्‍स हाकर बैठ जाएं। इससे तनाव के स्‍तर में कमी आती है। मधुमेह से ग्रस्‍त रोगियों को रोज़ बेहतर नींद लेनी चाहिए और संतुलित ग्‍लूकोज़ लेवल को बनाए रखने की कोशिश करें। हाल ही में हुए एक अध्‍ययन में यह बात सामने आई है कि निर्धारित एवं सही समय पर सोने का सेहत पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है।

अगर आप अपने लाइफस्‍टाइल में इन आदतों को शामिल करते हैं तो आप बिना दवाई के भी मधुमेह को नियंत्रित कर सकते हैं। दवाएं जहां बहुत महंगी होती हैं वहीं इन प्राकृतिक तरीकों से आप सस्‍ते में ही अपनी बीमारी को ठीक कर सकते हैं। किसी भी दवा से प्राकृतिक ईलाज सबसे बढिया रहता है इसलिए आपको भी इसे एक बार तो आज़माना ही चाहिए।

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