मधुमेह के मरीज़ों को सताते हैं कुछ इस तरह के डर

आप भले ही डर को मज़ाक में लेते हों लेकिन हमारे मन में आने वाली हर भावना और अहसास में डर भी शामिल है। नियंत्रित रूप में हो तो डर रोमांच से कम नहीं लगता, इससे हमारी सांसे तेज हो जाती हैं और दिल की धड़कनें बढ़ने लगती हैं।

टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ों को दिन में कई बार अपनी इस बीमारी की वजह से परेशान होन पड़ता है। इस बीमारी को कंट्रोल करने का कोई परफैक्‍ट ईलाज नहीं है। कभी ना कभी कुछ ना कुछ गलत हो ही जाता है। इसके लिए जरूरी होता है कि इस बीमारी को लेकर अपने मन में बैठे डर को दूर करने के लिए कुछ करें लेकिन हम ऐसा करते नहीं हैं और इस बीमारी के डर के साए में जीते रहते हैं।

आज हम आपको यही बताने जा रहे हैं कि मधुमेह के मरीज़ों के मन में कैसा और किस तरह का डर बैठा होता है जो उनका हर रोज़ और हर मिनट परेशान करता रहता है।

हाई ब्‍लड शुगर

Diabetes. Medical Concept on Red Background.

अगर आपको लंबे समय से टाइप 1 डायबिटीज़ है तो आपके लिए रोज़ लो ब्‍लड शुगर को कंट्रोल करना सबसे बड़ी चुनौती होती है। आपको ब्‍लड शुगर के उच्‍च स्‍तर को लो करना बहुत जरूरी होता है लेकिन आपको पता होता है आपको किस तरह इसे मैनेज करना जबकि मधुमेह के नए मरीज़ों या जिन्‍हें डायबिटीज़ के बारे में ज्‍यादा पता नहीं होता है उन्‍हें हाई ब्‍लड शुगर से बहुत डर लगता है। उन्‍हें हमेशा चिंता लगी रहती है कि कहीं इसकी वजह से उन्‍हें कोमा या एमरजेंसी रूम में जाना ना पड़े।

अगर मधुमेह के मरीज़ अपना पूरा ध्‍यान रखे या 24 घंटे में इंसुलिन की डोज़ लेते रहें तो इस डर पर काबू पाया जा सकता है।

भेदभाव

कई बार नौकरी के लिए अपनी मेडिकल स्थिति की पूरी जानकारी देना जरूरी नहीं होता है लेकिन कई बार मरीज़ों को लगने लगता है कि कहीं इसका असर उनकी प्रोफेशनल लाइफ पर ना पड़े या फिर लोग उनसे इस बीमारी की वजह से दूर ना भागने लगें। उन्‍हें लगता है कि कहीं इस बीमारी की वजह से कोई उन्‍हें ज्‍यादा मुश्किल या भारी काम देने से मना ना कर दे।

हालांकि, हम किसी और के व्‍यवहार को कंट्रोल तो नहीं कर सकते हैं लेकिन आप अगर अपनी सोच को थोड़ा सकारात्‍मक कर लें और समय पर अपनी दवाईयां लेते रहें तो आप भी अपने सहकर्मियों के साथ सामान्‍य जीवन जी सकते हैं। ऑफिस में अपने साथ हमेशा थोड़े सूखे-मेवे रखें, इससे भूख शांत रहती है।

बिलों की चिंता

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मधुमेह की बीमारी में देखभाल करना थोड़ा महंगा हो सकता है। अगर आप इस बीमारी से निपटने के लिए कोई नई या आधुनिक तकनीक का इस्‍तेमाल कर रहे हैं तो जेब पर बोझ और ज्‍यादा बढ़ जाता है। बीमारी से जुड़ी मुश्किलों से खर्चा और भी ज्‍यादा बढ़ जाता है, खासतौर पर जब बीमारी गंभीर हो चुकी हो।

ऐसे में आप या कोई और कुछ नहीं कर सकता है। आपको अपनी बीमारी को कंट्रोल करने के लिए दवाईयां तो लेनी ही पड़ेंगीं लेकिन हां साथ में आप अपनी डाइट में साबुत अनाज वगैरह को भी शामिल कर सस्‍ते में इस बीमारी को कंट्रोल कर सकते हैं।

क्‍या वो संभाल पाएगा

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जब सबसे पहले आपको अपने माता-पिता या पार्टनर के डायबिटीक होने का पता चलता है तो सबसे पहले मन में यही सवाल आता है कि – क्‍या वो इसे संभाल पाएंगें? ऐसा ख्‍याल मन में इसलिए भी आता है क्‍योंकि डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए अपनी डाइट का ख्‍याल रखना बहुत मुश्किल होता है और कभी-कभी इस वजह से वो डिप्रेशन तक में चले जाते हैं। ऐसे में आपको खुद चिंता ना करते हुए उन्‍हें सांत्‍वना देनी चाहिए और उन्‍हें मानसिक रूप से इससे लड़ने के लिए मजबूत करना चाहिए।

पूरी जिंदगी का चक्‍कर हो गया

कई बार मरीज़ों को इस बीमारी की मुश्किलों को देखकर ऐसा लगता है कि वो कभी इसके चंगुल से छूट ही नहीं पाएंगें। इस बीमारी की वजह से मरीज़ की जिंदगी, उसका लाइफस्‍टाइल, रूटीन और पूरी पर्सनैलिटी ही बदल जाती है। मन में ऐसा डर रहता है कि कहीं डायबिटीज़ की वजह से कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं या फिर कार्डियोवस्‍कुलर बीमारी हो जाए या अब तक किए गए सारे प्रयास विफल हो जाएं। मरीज़ अपने आप ही अपने मन में अपने भविष्‍य को लेकर डर जाता है। इसके लिए आपको ज्‍यादा डरने की जरूरत नहीं है क्‍योंकि ये हर दूसरे व्‍यक्‍ति में होता है। आपको तो बस संतुलित आहार लेना और योग एवं व्‍यायाम करना है, बाकी सब दवाओं और डॉक्‍टर पर छोड़ दें।

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