जानिए क्‍या है गर्भावधि मधुमेह, क्‍यों गर्भवती महिलाओं के लिए है एक बड़ा खतरा

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गर्भावधि मधुमेह, डायबिटीज़ का एक ऐसा प्रकार है जो गर्भवती महिलाओं में ब्‍लड शुगर का स्‍तर बढ़ जाने पर होता है। डायबिटीज़ मुख्‍य रूप से तीन प्रकार का होता है – एक टाइप 1 डायबिटीज़, दूसरा टाइप 2 डायबिटीज़ और तीसरा गर्भावधि डायबिटीज़। गर्भावधि मधुमेह को जेस्‍टेशनल डायबिटीज़ और गर्भकालीन मधुमेह भी कहा जाता है।

गर्भवती महिलाओं में से कम से कम 4 प्रतिशत महिलाएं इस बीमारी से ग्रस्‍त हो जाती हैं। आमतौर पर इस बीमारी का पता गर्भावस्‍था के अंतिम चरण में वल पाता है और ये बीमारी उन महिलाओं को ज्‍यादा होती है जिनके परिवार में भी किसी को डायबिटीज़ रही हो।

गर्भावधि मधुमेह का कारण

गर्भावस्‍था में कोर्टिसोल, एस्‍ट्रोजन जैसे हार्मोन के बढ़ने से शरीर में ब्‍लड शुगर की क्रिया में बाधा उत्‍पन्‍न होती है। इस अवस्‍था को इंसुलिन रेस्सिटेंस यानि इंसुलिन प्रतिरोध कहा जाता है। शरीर में इंसुलिन बनाने वाले अंग को पैंक्रियाज़ कहा जाता है। इनमें इंसुलिन प्रतिरोध द्वारा इंसुलिन में आई कमी की भरपाई करने की क्षमता होती है। अगर शरीर में पैंक्रियाज़ बढ़े हार्मोन के कारण पर्याप्‍त मात्रा में इंसुलिन का निर्माण नहीं कर पाते हैं तो शरीर में ब्‍लड शुगर का स्‍तर बढ़ जाता है और महिलाएं गर्भकालीन यानि गर्भाविध मधुमेह का शिकार हो जाती हैं।

इसके अलावा गर्भावधि मधुमेह के कई और भी कारण हो सकते हैं जो इस प्रकार हैं -:

  • अगर आप बहुत ज्‍यादा मोटी या ओवरवेट हैं।
  • इस प्रेग्‍नेंसी से पहले 4-5 किलो से अधिक वजन वाले बच्‍चे को जन्‍म दिया हो।
  • पिछली गर्भावस्‍था में गर्भावधि मधुमेह से ग्रस्‍त रही हों।
  • अगर आपके परिवार में मधुमेह का इतिहास रह चुका हो यानि की अपके लिए मधुमेह एक आनुवांशिक बीमारी हो।
  • हाई ब्‍लड प्रेशर या किसी और बीमारी की वजह से भी गर्भावधि मधुमेह हो जाता है।
  • पहले बच्‍चे के मृत या किसी प्रकार के दोष से ग्रसित हो।
  • 30 से ज्‍यादा की उम्र में गर्भवती होने पर।

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गर्भावधि मधुमेह के लिए क्‍या हैं स्‍क्रीनिंग नियम

सभी गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्‍था के दौरान नियमित जांच करवाते रहना चाहिए। अधिकतर गर्भवती महिलाओं की 24 से 28वें हफ्ते में जांच की जाती है।

गर्भावधि मधुमेह से मां को खतरा

गर्भावस्‍था के दौरान जेस्‍टेशनल डायबिटीज़ की वजह से महिलाओं को मूत्र संबंधी संक्रमण का खतरा रहता है। इसके अलावा उन्‍हें प्रीकाम्‍पसीआ जो कि एक स्थिति है जिसमें रक्‍तचाप बढ़ जाता है और गर्भावस्‍था के 20 सपताह के बाद मूत्र में अतिरिक्‍त प्रोटीन की उपस्थिति हो जाती है।

इस बीमारी के चलते प्रसव में भी परेशानियां और मुश्किलें आती हैं। प्रसव के लिए सिजेरियन भी करना पड़ सकता है। जेस्‍टेशनल यानि गर्भावधि मधुमेह के कारण मां को गर्भावस्‍था के बाद  टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा रहता है।

जेस्‍टेशनल डायबिटीज़ के लक्षण

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अधिकतर महिलाओं को गर्भावधि मधुमेह के लक्षण स्‍वयं में पता नहीं चल पाते हैं। गर्भावधि मधुमेह के कारण महिलाओं को अधिक प्‍यास लगती है और बार-बार पेशाब आता है और थकावट महसूस होती है।

अगर समय रहते जेस्‍टेशनल डायबिटीज का ईलाज ना किया जाए तो इसका असर होने वाले बच्‍चे पर भी पड़ सकता है और उसे भी कोई गंभीर समस्‍या हो सकती है। जिन गर्भवती महिलाओं में इस बीमारी का उपचार नहीं करवाया जाता है उनके बच्‍चे अधिक वजन वाले पैदा होते हैं। साथ ही जन्‍म के बाद बच्‍चे के ब्‍लड शुगर का स्‍तर भी अचानक से गिर सकता है। इसकी आपूर्ति इंजेक्‍शन द्वारा करनी पड़ती है।

जेस्‍टेशनल डायबिटीज़ की वजह से बच्‍चे में पीलिया और सांस संबंधी समस्‍याएं भी हो सकती हैं। लेकिन खास बात यह है कि इस बीमारी की वजह से बच्‍चे में किसी भी तरह का कोई जन्‍म संबंधी दोष उत्‍पन्‍न नहीं होता है क्‍योंकि जेस्‍टेशनल डायबिटीज़ गर्भावस्‍था के 20वें सप्‍ताह के बाद होती है और तब तक भ्रूण पूरी तरह से विकसित हो चुका होता है।

जेस्‍टेशनल डायबिटीज़ के लिए टेस्‍ट

जेस्‍टेशनल डायबिटीज़ का पता ब्‍लड टेस्‍ट के ज़रिए लगाया जा सकता है। अधिकतर गर्भवती महिलाओं की गर्भावस्‍था के 24वें और 28वें सप्‍ताह में जांच की जाती है लेकिन अगर आपको गर्भावधि मधुमेह का खतरा पहले से ही है तो आपके डॉक्‍टर गर्भावस्‍था के शुरुआती चरण में ही इसकी जांच करवा लेते हैं।

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क्‍या है ईलाज

सही डाइट और व्‍यायाम के ज़रिए महिलाओं को गर्भावस्‍था के दौरान जेस्‍टेशनल डायबिटीज़ से बचाया जा सकता है। इसके अलावा अगर आपको प्रेग्‍नेंसी में गर्भावधि मधुमेह हो गया है तब भी संतुलित आहार और व्‍यायाम से आप इस बीमारी को घातक बनने से रोक सकती हैं। रोज़ बादाम खाने से भी मधुमेह नियंत्रित रहता है।

बेहतर होगा कि आप दिनभर में थोड़ा-थोड़ा करके खाएं। एकसाथ ज्‍यादा भोजन करने से दिक्‍कत हो सकती है। इसके अलावा एंटीऑक्‍सीडेंट युक्‍त फूड खाने से भी महिलाओं में मधुमेह का खतरा कम हो जाता है।

अपनी नॉर्मल डाइट की तुलना में कार्बोहाइट्रेट का सेवन कम करें। शुगर की उच्‍च मात्रा वाले खाद्यों से दूर रहें। गर्भावधि मधुमेह में साबतु अनाज भी खा सकती हैं। ये ना केवल शरीर को पोषण देंगें बल्कि रक्‍त शर्करा के स्‍तर को भी संतुलित रखने का काम करेंगें। फल और सब्‍जियों से भी इसे नियंत्रित रखा जा सकता है।

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Gestational Diabetes

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