मधुमेह के रोगियों को आंखों का रखना चाहिए खास ख्‍याल वरना हो सकते हैं अंधे

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डायबिटीज़ के मरीज़ों में आंखों से संबंधित समस्‍याओं का खतरा बढ़ जाता है। शरीर में सही तरीके से इंसुलिन ना बनने के कारण ब्‍लड शुगर का स्‍तर बढ़ जाता है। बहुत ज्‍यादा ब्‍लड शुगर बनने पर तंत्रिकाओं को और रक्‍त कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है।

रक्‍त कोशिकाओं पर नकारात्‍मक असर पड़ने से आंखों की रोशनी कम होने या नेत्रहीन होने का खतरा रहता है। मधुमेह के मरीज़ों में इस बात का खतरा हमेशा बना रहता है इसलिए उन्‍हें हर साल अपनी आंखों की जांच करवाते रहना चाहिए।

आंखों को नुकसान के लक्षण

मधुमेह, आंखों को कई तरह से नुकसान पहुंचा सकता है। ब्‍लड शुगर के हाई होने पर या इंसुलिन का उपचार करने पर आंखों की रोशनी कम हो जाती है। कोई लक्षण नज़र नहीं आने पर भी आंखों को नुकसान हो जाता है इसलिए इसके लक्षणों के दिखने का इंतज़ार ना करें और आंखों का चेकअप करवाते रहें।

डायबिटीक रेटिनोपैथी

आंखों में पड़ने वाली रोशनी को रेटिना महसूस कर मस्तिष्‍क को दिखने वाली चीज़ों के बारे में संदेश भेजता है। ब्‍लड शुगर बढ़ने से रेटिना के अंदर की रक्‍त कोशिकाओं को क्षति पहुंचने को डायबिटीक रेटिनोपैथी कहते हैं।

शुरुआत में आपको कोई बदलाव नज़र नहीं आएगा लेकिन कुछ समय बाद रक्‍त कोशिकाओं से फ्लूइड निकल सकता है। मधुमेह रोग में रक्‍त कोशिका रेटिना पर धब्‍बा बना देती हैं और रेटिना को अपनी आंखों के पीछे से खींच लेती हैं जिससे आंखों की रोशनी जा सकती है।

उपचार – लेज़र सर्जरी

आंखों के चेकअप के दौरान डॉक्‍टर को रेटिनोपैथी के बारे में पता चल सकता है। रक्‍त कोशिकाओं के स्राव को चैक करने के लिए वो स्‍पेशल डाई का प्रयोग कर सकते हैं। शुरुआती समय में डायबिटीक रेटिनोपैथी को लेज़र सर्जरी से भी ठीक किया जा सकता है, इसे फोटोकोएगुलेशन कहते हैं। लेज़र रक्‍त कोशिकाओं को सील कर देती है जिससे वो बढ़ना और लीक होना बंद कर देती हैं।

विट्रेक्‍टोमी

डायबिटीक रेटिनोपैथी के बढ़ने पर आंखों के रेटिना से बहुत ज्‍यादा रक्‍त निकलने लगता है। ऐसे में डॉक्‍टर आपको विट्रेक्‍टोमी के लिए कह सकते हैं। इससे आंखों को साफ दिखाई देता है।

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खतरा

मधुमेह के मरीज़ों में लगभग सभी लोगों को रेटिनोपैथी की दिक्‍कत रहती है। ब्‍लड शुगर, ब्‍लडप्रेशर और कोलेस्‍ट्रॉल बढ़ने पर इसका खतरा बढ़ जाता है। image source 2

 

बचाव

ब्‍लड शुगर, ब्‍लडप्रेशर और कोलेस्‍ट्रॉल को नियंत्रित रखें। जो लोग मधुमेह की बीमारी का ध्‍यान रखते हैं उनमें डायबिटीक रेटिनोपैथी का खतरा कम रहता है। इस बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखने पर ही जांच करवा लें।

डॉक्‍टर को दिखाएं

अगर आपको मधुमेह है और इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दें तो सीधा नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें :

  • कम दिखना
  • धब्‍बा या परछाई आना
  • आंखों में दर्द या दबाव महसूस होना
  • एक या दोनों आंखों की अचानक रोशनी कम होना
  • आंखों पर पर्दा दिखाई देना

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Diabetes Complications — Eye Problems and Blindness

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