मानव कोशिकाओं से संभव है डायबिटीज़ का ईलाज

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मानव की स्‍टेम सेल्‍स में इंसुलिन का उत्‍पादन करने वाली कोशिकाओं को पकड़कर रखने की क्षमता होती है जिसे भविष्‍य में मधुमेह रोगियों में प्रत्‍यारोपित किया जा सकता है। हाल ही में हुए एक अध्‍ययन में ये बात सामने आई है कि इस दिशा में शोध करने से दुनियाभर में चल रहे डायबिटीज़ के उपचार के अध्‍ययनों को मदद मिलेगी।

इस अध्‍ययन की रिपोर्ट जरनल नेचर सैल बायोलॉजी में प्रकाशित हो चुकी है। इसमें पता चला है कि दुनियाभर में 415 मिलियन लोग डायबिटीज़ के मरीज़ हैं। इनमें से कई लोगों में पर्याप्‍त मात्रा में इंसुलिन का उत्‍पादन करने की क्षमता की कमी है। ये शरीर में ब्‍लड शुगर को नियंत्रित करता है। इंसुलिन उत्‍पादन की इस कमी की वजह से शरीर को कई घातक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

शोध के परिणाम में ये खुलासा हुआ है कि को‍शिकाओं के पोलारिटी का नियंत्रण कई मानव कोशिकाओं के प्रकार का विकास करने में अहम भूमिका निभाता है। उदाहरण के लिए तंत्रिका कोशिकाएं भी न्यूरॉन्स को संकेत संचारित कर सकती हैं।

stem cell

सैल पोलारिटी कई सेलुलर घटकों का संगठन होता है जिसमें प्‍लाज़मा मेंब्रेन, साइकोस्‍केलेटन और अंग शामिल हैं। अध्‍ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने इस बात गौर दिया कि किस तरह शरीर अंगों में गैस और तरल भेजने के लिए जटिल पाइपिंग सिस्‍टम का निर्माण करता है।

डेनमार्क में यूनिवर्सिटी ऑफ कोपेनहेगन के प्रोफेसर हेन्रिक सेंब का कहना है कि संकेतों की पहचान करके माउज़ उत्प्रेरक कोशिकाओं को कोशिकाओं बनने का निर्देश दिया जाता है जो ट्यूब बनाती हैं और बाद में इंसुलिन उत्पादन करने वाली बीटा कोशिकाएं बनती हैं। हम इस निष्‍कर्ष को मानव स्टेम कोशिकाओं में बीटा कोशिकाओं को अधिक मजबूत बनाने के लिए स्थानांतरित कर सकते हैं।

इस अध्‍ययन में आगे देखा गया कि वही संकेत एपिडर्मल ग्रोथ फैक्टर मार्ग – पोलारिटी परिवर्तनों के माध्यम से पाइप और बीटा कोशिकाओं के दोनों रूपों को नियंत्रित करता है।

इसलिए, बीटा कोशिकाओं में पैनक्रियाटिक प्रोजेनिटर का विकास पाइपों में उनकी अभिविन्यास पर निर्भर करता है। शोधकर्ताओं ने ये निष्‍कर्ष चूहों पर अध्‍ययन करने के बाद निकाला है।

सेंब का कहना है कि अब हम इस जानकारी की सहायता से बेहतर तरीके से लैब में मानव स्‍टेम कोशिकाओं को बीटा कोशिकाओं में बदलने में मदद मिलेगी। इससे मधुमेह से पीडित लोगों में खराब बीटा कोशिकाओं को बदला जा सकता है।

इसके अलावा डायबिटीज़ के मरीज़ों को नियंत्रित खानपान और उचित व्‍यायाम से भी लाभ मिल सकता है इसलिए मधुमेह रोगी अपने आहार पर जरूर ध्‍यान दें।

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